
संयुक्त राष्ट्र, 19 सितंबर . India की ओर से सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपनी मांग दोहराई गई है और कहा गया है कि कमर्शियल समुद्री आवाजाही ‘भू-Political तनाव का निशाना नहीं बननी चाहिए’. India के जहाजों और नागरिकों को होर्मुज जलडमरूमध्य के टकराव की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है.
India के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने Thursday को सुरक्षा परिषद में कहा, “नेविगेशन (समुद्री आवाजाही) के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए.” उन्होंने कहा, “India एक प्रमुख समुद्री देश है और हम एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करते हैं जो आजाद, खुला, सुरक्षित और नियमों पर आधारित हो.”
हरीश ने बहरीन की ओर से बुलाई गई परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में बात की. यह बैठक ‘आरिया-फॉर्मूला’ के तहत समुद्री सुरक्षा माहौल पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी. इसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1992 में इस संस्था की अध्यक्षता करते हुए ऐसी बैठकों की शुरुआत की थी.
होर्मुज जलडमरूमध्य के ब्लॉक होने से India को आर्थिक नुकसान भी हुआ है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में भारी उछाल आया. हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई रुकावटों का “ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है.”
उन्होंने उन घटनाओं या हमलों में शामिल पक्षों का नाम नहीं लिया, जिनमें ईरान और अमेरिका के साथ-साथ अन्य खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव के दौरान India को भी नुकसान उठाना पड़ा. India ने अपने नाविकों की मौत को लेकर ईरान और अमेरिका के सामने विरोध दर्ज कराया है, और तेहरान के सामने भारतीय-पंजीकृत जहाज पर हुए हमले का भी विरोध किया है.
अप्रैल में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं. जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया था.
India ने New Delhi में ईरानी राजनयिकों के सामने इन दोनों घटनाओं का विरोध किया. जून में, India ने New Delhi में अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी’अफेयर्स (कार्यवाहक प्रमुख) को बुलाकर तीन भारतीय नाविकों की मौत पर विरोध दर्ज कराया, जब अमेरिका ने उनके पलाऊ-पंजीकृत जहाज पर हमला किया था.
हरीश ने कहा कि India अपनी नौसेना को तैनात करके इस क्षेत्र के अशांत समुद्री इलाकों में समुद्री सुरक्षा में योगदान दे रहा है. हरीश के अनुसार, Monday तक भारतीय सुरक्षा अभियानों की मदद से 449 से ज्यादा कमर्शियल जहाज (जिनमें लगभग 20.3 मिलियन टन कार्गो या 8.4 बिलियन डॉलर से ज्यादा मूल्य का तेल था) अदन की खाड़ी और लाल सागर से गुजरे.
लाल सागर में ये रुकावटें हूथी मिलिशिया द्वारा पैदा की जा रही हैं, जो ईरान से जुड़ा यमन का एक विद्रोही समूह है. उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए मार्च में पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाजों के साथ ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ शुरू किया था.
संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फंसे हुए हैं. उनके पक्ष में बात करते हुए हरीश ने कहा, “नाविक हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में होने चाहिए. उनकी सुरक्षा, समय पर सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू में बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है.”
हरीश ने तकनीक के विकास से पैदा होने वाले नए खतरों की ओर ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि New Delhi “उभरते खतरों से निपटने के बढ़ते महत्व को पहचानती है, जिसमें बिना चालक दल वाले सिस्टम से हमले, साइबर जोखिम और नेविगेशन व संचार में बाधा डालना शामिल है.” उन्होंने आगे कहा, “इन चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीक का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण होगा.”
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एसडी/एएस