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Wednesday, 28 October 2026
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​’शहरों की चकाचौंध में गांव, गरीब और खेती को न भूलें’, शिवराज सिंह चौहान का कॉरपोरेट जगत से आह्वान

​’शहरों की चकाचौंध में गांव, गरीब और खेती को न भूलें’, शिवराज सिंह चौहान का कॉरपोरेट जगत से आह्वान

​New Delhi, 28 अक्टूबर . केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने Wednesday को New Delhi में आयोजित प्रतिष्ठित ‘डूइंग गुड फॉर India अवॉर्ड्स 2026’ एवं तीन दिवसीय ‘वन पर्पस इंडिया फोरम (ओपीआईएफ)’ के समापन समारोह में सहभागिता की.

इसमें बतौर मुख्य अतिथि अपने प्रेरक संबोधन में Union Minister शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय दर्शन, गांधीवादी ट्रस्टीशिप, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण को समाज सेवा तथा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) की सच्ची आत्मा बताया.

​समारोह में Union Minister शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति का मूल मंत्र ही ‘आत्मवत सर्वभूतेषु’, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘प्राणियों में सद्भावना हो व विश्व का कल्याण हो’ रहा है. महाIndia के यक्ष प्रश्न का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि मनुष्य जानते हुए भी कि यह संसार स्थायी नहीं है, सब कुछ केवल अपने लिए जोड़ने में लगा रहता है. उन्होंने कहा कि हम इस दुनिया में एक धर्मशाला की तरह ठहरे हैं.

महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए Union Minister शिवराज सिंह ने कहा कि कॉरपोरेट और संपन्न वर्ग अपनी अर्जित संपत्ति को केवल स्वयं का न समझे. ईश्वर द्वारा बनाए गए जल, जंगल, जमीन और खनिज जैसे संसाधनों पर पूरे समाज का अधिकार है. सीएसआर कोई 2 प्रतिशत की कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व और प्रेम से उपजी सेवा भावना है. उन्होंने उद्योग जगत को समाज की संपत्ति का ‘ट्रस्टी’ बनकर वंचितों के कल्याण में आगे आने को कहा.

ग्रामीण विकास की उपलब्धियों को साझा करते हुए Union Minister चौहान ने बताया कि देश में महिला स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) से 10 करोड़ बहनें जुड़ी हैं, जिनमें से 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. बैंकों के माध्यम से 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए का लिंकेज सुनिश्चित किया गया है और इन बहनों का एनपीए (एनपीए) भी महज 1 प्रतिशत के आसपास है. उन्होंने कॉरपोरेट जगत और परोपकारी संस्थाओं से आह्वान किया कि वे महिला समूहों को ट्रेनिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केट लिंकेज में सीएसआर के जरिए सहयोग दें.

चौहान ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर देते हुए सभी से जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ और पूर्वजों की स्मृति में पेड़ लगाने का आग्रह किया. अत्यधिक केमिकल फर्टिलाइजर और कीटनाशकों के प्रयोग से धरती की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज जमीन को उर्वर बनाने वाले केंचुए तक गायब हो रहे हैं. कृषि को स्वास्थ्य से जोड़ना होगा और वैज्ञानिकों के शोध को सीधे खेतों तक यानी ‘लैब टू लैंड’ पहुँचाना होगा. उन्होंने आश्वस्त किया कि Prime Minister श्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह अभेद्य और आत्मनिर्भर है.

Union Minister चौहान ने पुरजोर शब्दों में कहा, “शहरों की चमक-दमक में हमें गांव, गरीब और खेती को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि असली हिंदुस्तान हमारे गांवों में बसता है.” उन्होंने सामुदायिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और सामाजिक नवाचार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी.

​समारोह के मंच पर सीएसआरबीओएक्स के संस्थापक एवं सीईओ भौमिक शाह, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अश्विन महालिंगम, ‘नारायण सेवा संस्थान’ के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल सहित कॉरपोरेट, सामाजिक संस्थाओं और परोपकारी जगत के प्रमुख प्रतिनिधि एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे. तीन दिवसीय इस महामंथन का समापन विकसित India के निर्माण में जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग को निरंतर मजबूत करने के साझा संकल्प के साथ हुआ.

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डीकेपी/

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