वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की बड़ी भूमिका के लिए पीएम मोदी ने ब्रिक्स रोडमैप का रखा प्रस्ताव

New Delhi, 12 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi ने Saturday को ब्रिक्स को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए 10 वैश्विक शासन सुधारों का रोडमैप तैयार करने की जोरदार पैरवी की कि ग्लोबल साउथ को दुनिया के निर्णय लेने वाले केंद्रों में अधिक प्रभावी भूमिका मिले.

Prime Minister ने New Delhi में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित ब्रिक्स सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ हमें वैश्विक सुधार के लिए भी एक रास्ता तैयार करना चाहिए. वर्तमान वैश्विक शासन व्यवस्था एक पिरामिड जैसी है, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में सक्षम नहीं हैं.”

उन्होंने कहा कि यह असंतुलन ग्लोबल साउथ के लिए विशेष रूप से स्पष्ट है. ग्लोबल साउथ खुद को वैश्विक संकटों के केंद्र में पाता है, लेकिन निर्णय लेने वाले केंद्रों से बाहर है.

वैश्विक शासन की संरचना में बुनियादी बदलाव का आह्वान करते हुए Prime Minister मोदी ने कहा कि मौजूदा “विशेषाधिकारों के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा.”

उन्होंने कहा, “India द्वारा आयोजित इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का संदेश स्पष्ट होना चाहिए. यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए. आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक, यही इस समय ब्रिक्स का मार्गदर्शक संकल्प होना चाहिए.”

Prime Minister मोदी ने कहा, “इसी उद्देश्य से मैं प्रस्ताव करता हूं कि हम मिलकर वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप देने का प्रयास करें.”

Prime Minister के इस प्रस्ताव से अगले नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले नई वैश्विक व्यवस्था के लिए ब्रिक्स के सुधार एजेंडे को एक ठोस रूप देने की दिशा में पहल सामने आई है.

Prime Minister मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर देश की आवाज हो, प्रत्येक सदस्य की इसमें हिस्सेदारी हो और मानवता का विकास वैश्विक सहयोग के केंद्र में बना रहे.

उन्होंने रोडमैप तैयार करने के लिए तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही. इनमें प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण शामिल हैं.

प्रतिनिधित्व की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए Prime Minister मोदी ने कहा, “मैं कहना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता. इस विषय पर बातचीत को एक निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ना होगा. इसी तरह वित्तीय संस्थानों में मतदान का अधिकार, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए. जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए.”

जवाबदेही के तहत Prime Minister मोदी ने सामूहिक प्रतिक्रिया की गति, स्तर और अंतिम छोर तक प्रभाव को मजबूत करने के लिए ‘सीफेयर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ बनाने की जोरदार वकालत की.

वहीं, नियम-निर्माण के मुद्दे पर Prime Minister मोदी ने कहा, “भविष्य के वैश्विक विकास को निर्धारित करने वाले नियमों को बनाने में समान भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां न केवल भविष्य के लिए अवसर पैदा कर रही हैं, बल्कि भविष्य के नियमों को भी आकार दे रही हैं.”

डीएससी

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