
New Delhi, 14 अक्टूबर . किसी भी देश, समाज या परिवार की तरक्की में महिलाओं की अहम भूमिका होती है. महिलाओं की न केवल Government बनाने में, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में भी बराबर की हिस्सेदार होती है. आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ा रही हैं, लेकिन अभी भी ग्रामीण महिलाएं कई पहलू में पीछे हैं.
ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके मौलिक अधिकारों के जरिए उन्हें मजबूत करने के लिए हर वर्ष 15 अक्टूबर को ‘विश्व ग्रामीण महिला दिवस’ मनाया जाता है. Thursday को अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस देश समेत दुनिया के अलग-अलग देशों में मनाया जाएगा. इस खास अवसर पर आइए हम आपको इस दिवस को मनाने का उद्देश्य और थीम के बारे में बताते हैं.
अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाने का उद्देश्य कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण गरीबी दूर करने में ग्रामीण महिलाओं के योगदान और उनकी भूमिका को सम्मान देना है. विश्व ग्रामीण महिला दिवस के खास अवसर पर देश-दुनिया में विभिन्न कार्यक्रम और समारोह का आयोजन कर देश और समाज की उन्नति एवं प्रगति में उनके योगदान को स्मरण किया जाता है.
विश्व ग्रामीण महिला दिवस मनाने का सुझाव 1995 में बीजिंग में हुए चौथे विश्व महिला सम्मेलन में दिया गया था. बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने 18 दिसंबर 2007 को अपने प्रस्ताव के माध्यम से इसकी स्थापना की, जिसके बाद इस दिन को प्रत्येक वर्ष आधिकारिक रूप से मनाया जाने लगा.
विश्व ग्रामीण महिला दिवस पहली बार 15 अक्टूबर 2008 को मनाया गया था. इस वर्ष विश्व ग्रामीण महिला दिवस की थीम ‘सभी के लिए अच्छे भोजन का उत्पादन करने वाली ग्रामीण महिलाएं’ है. यह दिन इस बात पर जोर देता है कि कृषि श्रम और खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की अहम भूमिका है, लेकिन अभी भी उन्हें भूमि, तकनीक और वित्तीय संसाधनों तक समान अधिकार मिलने बाकी हैं.
यह दिन ग्रामीण और मूल निवासी महिलाओं के अहम योगदान का सम्मान करता है. इस दिन उन चुनौतियों को दूर करने की जरूरत पर भी जोर दिया जाता है, जिनका सामना ग्रामीण महिलाओं को जमीन के अधिकार, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में करना पड़ता है.
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डीके/डीकेपी