विदेशी निवेशकों की दमदार वापसी, एक हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में लगाए 45,960 करोड़ रुपए

Mumbai , 7 नवंबर . इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की भूमिकाओं में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार पांचों कारोबारी सत्रों में खरीदारी करते हुए कुल 45,960 करोड़ रुपए का निवेश किया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) मुनाफावसूली के चलते पूरे सप्ताह शुद्ध विक्रेता बने रहे.
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि विदेशी निवेशकों ने लगातार दूसरे सप्ताह खरीदारी जारी रखी. इससे पहले एफआईआई लगातार 10 सप्ताह तक बिकवाली कर रहे थे. उल्लेखनीय बात यह रही कि एक ही सप्ताह में की गई खरीदारी अक्टूबर में हुई 45,162 करोड़ रुपए की कुल बिकवाली से भी अधिक रही.
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पूरे सप्ताह बिकवाली की और कुल 24,197 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. इसके साथ ही डीआईआई की लगातार 11 सप्ताह से जारी खरीदारी का सिलसिला समाप्त हो गया. विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में आई तेज बढ़त के बीच घरेलू निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी.
शुद्ध संस्थागत निवेश के लिहाज से बाजार में कुल 21,764 करोड़ रुपए का सकारात्मक प्रवाह देखने को मिला, जिसने बाजार की तेजी को मजबूती प्रदान की. विशेष रूप से Thursday और Friday को गतिविधि काफी तेज रही. इन दो दिनों में एफआईआई ने 28,724 करोड़ रुपए की खरीदारी की, जबकि डीआईआई ने 16,413 करोड़ रुपए के शेयर बेचे.
विदेशी निवेश के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने लगातार सातवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की, जो पिछले तीन वर्षों की सबसे लंबी तेजी मानी जा रही है. Friday को बैंकिंग और मजबूत तिमाही नतीजों वाले शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया.
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन Friday को घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 81,028.02 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 493.75 अंक यानी 2.01 प्रतिशत उछलकर 25,030.35 के स्तर पर पहुंच गया.
विश्लेषकों के अनुसार, यह भारतीय बाजार के इतिहास की सबसे मजबूत साप्ताहिक रैलियों में से एक रही. दोनों प्रमुख सूचकांकों ने सप्ताह भर में 8.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की. इसके पीछे विदेशी निवेशकों की वापसी, कंपनियों के उम्मीद से बेहतर वित्तीय नतीजे, भू-Political तनाव में कमी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जैसे प्रमुख कारण रहे.
बाजार में खरीदारी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अधिकांश सेक्टरों और सूचकांकों में व्यापक भागीदारी देखने को मिली. इससे निवेशकों के भरोसे में भी सुधार हुआ.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी. चूंकि घरेलू निवेशकों ने हालिया तेजी में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की है, इसलिए बाजार की मजबूती बनाए रखने के लिए एफआईआई निवेश का निरंतर बने रहना महत्वपूर्ण होगा.
नया संवत भी बाजार के लिए सकारात्मक माहौल में शुरू होगा. आगामी सप्ताह छुट्टियों के कारण छोटा रहेगा और इसकी शुरुआत Sunday को आयोजित होने वाले मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र से होगी. विश्लेषकों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश प्रवाह जारी रहता है और वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहते हैं, तो बाजार में तेजी का रुख आगे भी बरकरार रह सकता है.
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