वंदे मातरम पर उमर अब्दुल्ला बधाई के हकदार, कांग्रेस को क्यों हो रही आपत्ति: साध्वी निरंजन ज्योति

Lucknow, 10 सितंबर . राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की चेयरपर्सन साध्वी निरंजन ज्योति ने Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव के एआई से तैयार Chief Minister योगी आदित्यनाथ के वीडियो, वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस की आपत्ति, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ और गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि Political विरोध विचारधारा और विकास के मुद्दों पर होना चाहिए, लेकिन व्यक्तिगत जीवन या धार्मिक पहचान को निशाना बनाना उचित नहीं है.

अखिलेश यादव के एआई से बनाए गए Chief Minister योगी के वीडियो पर साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि Political स्तर इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए कि किसी व्यक्ति के निजी जीवन को लेकर एआई से वीडियो तैयार कर प्रचारित किया जाए. उन्होंने इसे साधु समाज के लिए भी अपमानजनक बताया.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में Political प्रतिद्वंद्विता स्वाभाविक है और नेताओं को एक-दूसरे के खिलाफ विचारधारा और विकास के मुद्दों पर लड़ना चाहिए. व्यक्तिगत जीवन पर प्रहार करना उचित नहीं है. Chief Minister रहे व्यक्ति या Chief Minister पद की आकांक्षा रखने वाले नेता के संदर्भ में इस तरह का वीडियो चलाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से भगवा वस्त्र और सन्यासी जीवन को लेकर बनाए गए वीडियो पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि किसी Chief Minister की Political नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन भगवा रंग या सनातन परंपरा को निशाना बनाना उचित नहीं है.

जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला द्वारा वंदे मातरम गाए जाने और कांग्रेस की ओर से इस पर आपत्ति जताए जाने के सवाल पर साध्वी निरंजन ज्योति ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए. उन्होंने उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला की ओर से वंदे मातरम के सम्मान को लेकर उन्हें बधाई दी. उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समुदाय से आने वाले नेता वंदे मातरम का सम्मान कर रहे हैं तो कांग्रेस नेताओं को इससे आपत्ति क्यों होनी चाहिए. वंदे मातरम किसी एक धर्म की उपासना या धार्मिक गीत नहीं है, बल्कि India के प्रति राष्ट्रीय भावना से जुड़ा गीत है. स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के संघर्ष में बड़ी संख्या में युवाओं ने वंदे मातरम के साथ राष्ट्र के लिए बलिदान दिया. ऐसे में वंदे मातरम का अपमान उन स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान से भी जुड़ा विषय है.

दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर साध्वी निरंजन ज्योति ने इसे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा. उन्होंने दावा किया कि यह सनातन धर्म के लिए यात्रा नहीं, बल्कि चुनावी यात्रा है. यात्रा निकालना या चुनावी रैलियां करना लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी को इससे आपत्ति नहीं है. लेकिन चुनावी यात्रा को ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का नाम देना उचित नहीं है. कम से कम इस बहाने विपक्ष को सनातन की याद तो आई. उन्होंने दिग्विजय सिंह के साथ खड़े नेताओं को लेकर भी Political टिप्पणी की और आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोग भी उनके समर्थन में हैं, जिन्होंने पहले सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं.

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान शराब की बिक्री और मांस की दुकानों को बंद रखने के फैसले और Maharashtra में गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उठ रहे सवालों पर साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि अलग-अलग समुदायों की अपनी-अपनी उपासना पद्धतियां होती हैं. उन्होंने गरबा आयोजनों के संदर्भ में कहा कि वहां बड़ी संख्या में महिलाएं हिस्सा लेती हैं और कई बार ऐसे लोगों के पहुंचने की शिकायतें सामने आती हैं, जिनके कारण कार्यक्रमों में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. ऐसे आयोजनों में अनावश्यक लोगों के प्रवेश को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है.

पीएसके

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