Skip to content
Tuesday, 27 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
INDIA

रीवा में टाटा पावर के परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर कांग्रेस के सवाल, आपत्तियों के बावजूद मंजूरी देने का आरोप

रीवा में टाटा पावर के परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर कांग्रेस के सवाल, आपत्तियों के बावजूद मंजूरी देने का आरोप

रीवा/Bhopal , 26 अक्टूबर . कांग्रेस ने Monday को Madhya Pradesh के रीवा जिले में टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए प्रारंभिक ड्रिलिंग की मंजूरी पर सवाल उठाए. पार्टी का आरोप है कि यह अनुमति ग्राम सभा के विरोध के बावजूद दी गई.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने Bhopal में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह मुद्दा उठाया. उन्होंने एक दिन पहले रोजहौही-सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना स्थल का दौरा किया था और वहां विरोध प्रदर्शन कर रहे आदिवासी तथा अन्य ग्रामीणों से मुलाकात की थी.

सिंघार ने कहा, “जब ग्राम सभा ने स्पष्ट रूप से सहमति देने से इनकार कर दिया था, तो फिर ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (एनओसी) किस आधार पर जारी किया गया? Government को इसकी परिस्थितियों की जानकारी देनी चाहिए और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए.”

सिंघार के अनुसार, 3 सितंबर को ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से ड्रिलिंग के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था. उनका दावा है कि ग्राम पंचायत ने 5 सितंबर को पत्र के माध्यम से जिला कलेक्टर को इस फैसले की जानकारी भी दे दी थी. इसके बावजूद 23 सितंबर को एनओसी जारी कर दिया गया, जिसमें कथित तौर पर 4 सितंबर के सहमति पत्र का हवाला दिया गया है.

उन्होंने कहा कि सरपंच कोमल संजय सिंह ने 8 अक्टूबर को संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर से संपर्क कर कथित सहमति पत्र की सत्यता की जांच कराने और एनओसी रद्द करने की मांग की थी.

प्रस्तावित परियोजना में 220-220 मेगावाट की दो परमाणु ऊर्जा इकाइयों की स्थापना की योजना है. स्थानीय निवासी, जिनमें आदिवासी परिवार, छोटे किसान और कृषि मजदूर शामिल हैं, सुरक्षा, पानी की उपलब्धता, कृषि आजीविका और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर परियोजना का विरोध कर रहे हैं.

सिंघार ने Government से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए), भूकंपीय जोखिम अध्ययन और जल उपलब्धता का आकलन पूरा किया गया है या नहीं.

उन्होंने आपदा प्रबंधन की तैयारियों, प्रस्तावित रिएक्टरों के स्थान और सुरक्षा क्षेत्र के दायरे में आने वाले गांवों तथा परिवारों की संख्या की जानकारी भी मांगी.

सिंघार ने कहा, “Government को बताना चाहिए कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और आदिवासी परिवारों तथा किसानों के हितों की रक्षा किस प्रकार होगी.”

उन्होंने आंदोलन के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मृत्यु का भी उल्लेख किया और प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की.

सिंघार ने कहा, “जहां दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हो जाती है और जहरीले कफ सिरप से मासूम बच्चों की जान चली जाती है, वहां Government परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकती है?”

–

एएमटी/एबीएम

Share