
jaipur, 7 अक्टूबर . Rajasthan के पूर्व Chief Minister और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने Wednesday को कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ First Information Report दर्ज होने की आलोचना करते हुए देश में लोकतंत्र की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की.
दिल्ली में हाल के घटनाक्रम और दोनों कांग्रेस नेताओं के खिलाफ First Information Report दर्ज होने के बाद Political तनाव बढ़ गया है.
jaipur में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने केंद्र Government पर तीखा हमला बोला और सवाल उठाया कि क्या India में लोकतंत्र इन बढ़ते तानाशाही कार्यों के बीच टिक पाएगा.
उन्होंने सवाल किया कि क्या India की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी उसी तरह कमजोर किया जा रहा है, जैसा उनके विचार में चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों की Political व्यवस्थाओं को किया जा रहा है.
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व Chief Minister ने कहा कि Government और प्रशासन की ऐसी कार्रवाइयां अप्रत्याशित नहीं थीं, और टिप्पणी की कि ‘वे कुछ भी कर सकते हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के खिलाफ First Information Report दर्ज होना, साथ ही कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के प्रति Police का आपत्तिजनक आचरण, देश की दिशा को दर्शाता है.
गहलोत ने कहा कि इस मुद्दे को केवल एक Political दल या कुछ नेताओं का मामला नहीं समझना चाहिए.
पूर्व Chief Minister के अनुसार, यह पूरे देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
गहलोत ने आकाशवाणी भवन के पास राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से जुड़े विरोध प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं पर भी बात की.
गहलोत के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन केंद्र Government और जनता को एक संदेश देने के उद्देश्य से किया गया था, क्योंकि लगभग 300 सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उन्हें आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं मिली.
पूर्व Chief Minister ने सवाल किया कि चुनाव आयोग के अधिकारी विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों से मिलने के लिए तैयार क्यों नहीं थे.
संसद में अपने अनुभव का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि संसद परिसर एक अत्यंत सुरक्षित स्थान है और उन्होंने बताया कि उन्होंने वहां लगभग दो दशकों तक काम किया है.
उन्होंने आगे कहा कि यदि तीनों चुनाव आयुक्तों ने वहां इंडिया ब्लॉक के सांसदों से मुलाकात की होती, तो ‘वोट चोरी’ के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे से संबंधित सवालों का पारदर्शी ढंग से समाधान करने का अवसर मिल सकता था.
इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया कि यह अवसर चूक गया, नेताओं को हिरासत में लिया गया और बाद में उनके खिलाफ First Information Report दर्ज की गई.
गहलोत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं और चेतावनी दी कि स्थिति ‘खतरनाक दिशा’ में बढ़ रही है.
उन्होंने Prime Minister Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से घटनाक्रम पर सार्वजनिक बयान न दिए जाने पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि देश भर में कई स्थानों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर, देश के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए.
गहलोत के अनुसार, Prime Minister और गृह मंत्री की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलने से वर्तमान Political व्यवस्था के कामकाज पर गंभीर सवाल उठते हैं.
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एमएस/