
New Delhi, 7 अक्टूबर . Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और ‘इंडिया’ ब्लॉक के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. इस विरोध प्रदर्शन पर भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है.
तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राव ने से बातचीत में कहा, “राहुल गांधी वोटरों के हटाए जाने का दावा करके पूरे देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. यह लोगों को गुमराह करने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है. फॉर्म 7 वोटरों के नाम हटाने के लिए एक आवेदन है, लेकिन राहुल गांधी और इंडी गठबंधन भी देश के लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि माइनॉरिटी वोट हटाए जा रहे हैं. यह सच नहीं है. वे अभी भी लोगों को गुमराह कर रहे हैं.”
विजयवाड़ा में भाजपा की नेशनल काउंसिल की सदस्य यामिनी शर्मा ने कहा, “राहुल गांधी का देशद्रोह का आरोप चुनाव आयोग, खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त और भारतीय लोकतंत्र पर एक गैर-जिम्मेदाराना हमला है. राहुल गांधी किस हैसियत से Prime Minister और चुनाव आयोग को धमकी दे रहे हैं? तो क्या राहुल गांधी को लगता है कि वह कानून और लोकतंत्र से ऊपर हैं और उनका परिवार लोकतंत्र से ऊपर है? हम इन ‘नाराज फूफा’ जैसे लोगों के लिए जवाबदेह नहीं हैं, हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं.”
एसआईआर विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के विरोध पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, “राहुल गांधी को पहले यह तय करना चाहिए कि वे लोकतंत्र में विश्वास करते हैं या धमकी की राजनीति में. Prime Minister Narendra Modi और अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई की बात करना बेतुका है. चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्होंने कल शाम 4 बजे तक चुनाव आयोग से मिलने का समय नहीं मांगा था. चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और अगर Political नेता उससे मिलना चाहते हैं, तो वे समय मांग सकते हैं.”
जेडीयू के महासचिव श्याम रजक ने कहा, “राहुल गांधी विपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें नियमों और कानूनों की जानकारी होनी चाहिए. किसी से मिलने या कोई मुद्दा उठाने के लिए तय प्रक्रियाएं होती हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि किस मंच पर जाना है और मामला कैसे उठाना है. अगर इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो इसका मतलब होगा कि वे लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते हैं. वे कोई राजा नहीं हैं जो जब चाहें आदेश जारी कर दें और उम्मीद करें कि कोई उनसे मिलने आएगा. हर किसी की अपनी जिम्मेदारियां होती हैं.”
भाजपा प्रवक्ता समता ने कांग्रेस और बीआरएस पर वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि Supreme Court ने चुनाव आयोग या ‘फॉर्म 7’ के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है और सवाल उठाया कि कांग्रेस Government प्रशासनिक चिंताओं को दूर करने के बजाय भाजपा पर आरोप क्यों लगा रही है.
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “कांग्रेस पार्टी के नेता असलियत से पूरी तरह कट चुके हैं. सत्ता की चाहत में उन्हें चीजें साफ-साफ दिखाई नहीं देतीं. वे हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते रहते हैं. जब वे चुनाव जीतते हैं तो चुनाव आयोग अच्छा होता है, लेकिन जब वे हारते हैं, तो चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं.”
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ओपी/एएस