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Friday, 30 October 2026
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राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी पंकज ओझा को थमाया आरोप पत्र, फेसबुक पर सांप्रदायिक पोस्ट का आरोप

Rajasthan  Government ने वरिष्ठ Rajasthan  प्रशासनिक सेवा अधिकारी पंकज ओझा को थमाया आरोप पत्र, फेसबुक पर सांप्रदायिक पोस्ट का आरोप

jaipur, 29 अक्टूबर . Rajasthan Government ने वरिष्ठ Rajasthan प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी पंकज ओझा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करते हुए उन्हें आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया है. उन पर अक्टूबर 2025 के दौरान फेसबुक पर कथित तौर पर जाति आधारित, सांप्रदायिक और Political रूप से संवेदनशील पोस्ट साझा करने का आरोप है.

कार्मिक विभाग ने अधिकारी को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है.

वर्तमान में पंकज ओझा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया है कि उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट social media पर प्रसारित किए गए थे.

चार्जशीट के अनुसार, ओझा ने कथित तौर पर अपने फेसबुक अकाउंट ‘आरएएस पंकज ओझा’ के जरिए 16, 19, 21, 22, 23, 24, 25 और 27 अक्टूबर 2025 को आपत्तिजनक, भड़काऊ और Political रूप से संवेदनशील सामग्री साझा की थी. उस समय वह गोपालन विभाग के निदेशक के पद पर कार्यरत थे.

कार्मिक विभाग के अनुसार, उसे शिकायत मिली थी कि अधिकारी द्वारा जातीय और सांप्रदायिक टिप्पणियां की जा रही हैं. इसके बाद 19 जनवरी 2026 को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था. विभाग का कहना है कि उस नोटिस का कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ.

आरोप पत्र में कहा गया है कि कुछ पोस्टों में Prime Minister तथा विभिन्न राज्यों के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए कथित रूप से अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया गया.

विभाग का कहना है कि ऐसी सामग्री सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है और यह एक Governmentी अधिकारी से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है.

कार्मिक विभाग ने आरोप लगाया है कि यह आचरण Rajasthan सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का उल्लंघन है तथा इससे Government और विभाग की छवि प्रभावित हुई है.

चार्जशीट में 25 अक्टूबर 2025 की एक कथित पोस्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें केंद्र Government की जाति आधारित जनगणना नीति पर सवाल उठाया गया था.

कथित पोस्ट में लिखा गया था, “सिर्फ जाति आधारित जनगणना ही क्यों? जाति आधारित करदाताओं और जाति आधारित अपराधों का आंकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पता चल सके कि कौन कितना योगदान देता है.”

विभाग ने इसे Governmentी नीति की आलोचना मानते हुए सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला बताया है.

पंकज ओझा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं की. उनके अनुसार, उनके नाम का इस्तेमाल कर फर्जी स्क्रीनशॉट बनाए गए और social media पर फैलाए गए.

उन्होंने कहा, “मैंने कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं की. मेरे नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट प्रसारित किए गए. वास्तव में मैं खुद इस मामले का पीड़ित हूं.”

ओझा का कहना है कि 29 दिसंबर 2025 को उन्होंने कार्मिक सचिव और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने jaipur Police आयुक्त से भी मुलाकात कर शिकायत की थी.

उनके मुताबिक, इस संबंध में अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी और मामला जांच के अधीन है.

ओझा ने दावा किया कि 27 जनवरी 2026 को उन्होंने राज्य Government के ‘राजकाज’ पोर्टल के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल कर दिया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि कथित पोस्ट फर्जी हैं और उनके नाम से बनाई गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास जवाब जमा करने की रसीद मौजूद है.

फिलहाल, मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई के चरण में है. Government ने आरोप पत्र जारी कर जवाब मांगा है, जबकि पंकज ओझा लगातार आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को साजिश का शिकार बता रहे हैं.

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एएमटी/डीकेपी

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