यूसुफ पठान को मिली बड़ी राहत, विवादित प्लॉट आवंटित करने के लिए राज्य सरकार ने दी मंजूरी

वडोदरा, 20 अक्टूबर . India के पूर्व क्रिकेटर और Lok Sabha सांसद यूसुफ पठान को Gujarat Government से बड़ी राहत मिली है. जिस प्लॉट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, उसे Government ने यूसुफ को अवांटित करने की मंजूरी दे दी है.
राज्य Government ने तांदलजा क्षेत्र में स्थित 978 वर्ग मीटर के प्लॉट, जिसकी कीमत 20.53 करोड़ रुपये है, उसको यूसुफ को अवांटित करने की हरी झंडी दी है. कुल 978 वर्ग मीटर जमीन में से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उद्देश्य से निःशुल्क उपहार के रूप में दी जाएगी. शेष 478 वर्ग मीटर जमीन निर्धारित मूल्य पर 45 प्रतिशत की छूट के साथ हस्तांतरित की जाएगी. राज्य Government ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल विशेष मामले के रूप में लिया गया है और इसे भविष्य के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा.
राजस्व विभाग इस जमीन के मूल्य के बराबर दूसरी जमीन वडोदरा महानगरपालिका (वीएमसी) को मुआवजे के रूप में आवंटित करेगा. प्लॉट आवंटन को लेकर वडोदरा महानगरपालिका की स्थायी समिति और सामान्य सभा की मंजूरी के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा. इस विवादित प्लॉट के पास ही पठान परिवार का घर स्थित है. गौरतलब है कि यूसुफ हाल ही में तृणमूल कांग्रेस पार्टी को छोड़कर नेशनलिस्ट सिटजिन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए हैं.
साल 2012 में यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) से बिना नीलामी के एक प्लॉट 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी. अपने आवेदन में उन्होंने पूर्व क्रिकेटर होने और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था. वीएमसी ने इस प्रस्ताव पर सहमति भी जता दी थी और उस समय प्लॉट की कीमत करीब 5.6 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसे चुकाने के लिए पठान तैयार थे. हाालंकि, बिना नीलामी के जमीन आवंटित करने के लिए राज्य Government की मंजूरी जरूरी थी. बाद में 2014 में Gujarat के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था. इसके बावजूद नगर निगम का आरोप था कि प्रस्ताव रद्द होने के बाद भी पठान ने जमीन के चारों ओर घेराबंदी कर ली थी.
इसके बाद 2024 में नगर निगम ने कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पठान को नोटिस जारी किया. इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए उन्होंने Gujarat हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हालांकि, अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने Government के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें जमीन का आवंटन खारिज किया गया था. वहीं, जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह सवाल उठाया कि जब न तो जमीन का आवंटन हुआ और न ही उसके लिए कोई भुगतान या आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं, तो किसी व्यक्ति का उस जमीन पर अधिकार कैसे माना जा सकता है. इसके बाद 31 अगस्त 2026 को यूसुफ ने हाई कोर्ट से बिना शर्त अपनी याचिका वापस ले ली थी.
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एसएम/डीकेपी


