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Wednesday, 28 October 2026
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यूपी एमएलसी चुनाव: 11 सीटों पर सात जिलों में काउंटिंग जारी, मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

यूपी एमएलसी चुनाव: 11 सीटों पर सात जिलों में काउंटिंग जारी, मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Lucknow, 27 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले Political रूप से अहम माने जा रहे विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के लिए Tuesday सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हो गई. प्रदेश के सात जिलों में बनाए गए मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच मतपत्रों की छंटाई और बंडल बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई.

इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने मौजूदा प्रभाव को बरकरार रखने की कोशिश में है, जबकि Samajwadi Party (सपा) शिक्षक और स्नातक वर्ग में अपना समर्थन बढ़ाने की उम्मीद कर रही है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, विधान परिषद के पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना Lucknow, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर में कराई जा रही है. सुबह आठ बजे स्ट्रांग रूम से बैलेट बॉक्स निकालकर निर्धारित मतगणना टेबलों तक पहुंचाए गए. सील की जांच के बाद मतपेटियां खोली गईं और मतपत्रों को निकालकर उनकी छंटाई तथा बंडल बनाने का काम शुरू हुआ.

Lucknow में रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल पर मतगणना के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. केंद्र पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है. प्रत्याशी और उनके एजेंट मतगणना प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं. इसी तरह अन्य जिलों में भी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है. वाराणसी में मतगणना की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डीआईजी शिवहरि मीना ने बताया कि Police प्रशासन ने तीन स्तरों पर सुरक्षा योजना तैयार की है. इसमें बाहरी, आंतरिक और आइसोलेशन घेरा शामिल है.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ social media पर भी निगरानी रखी जा रही है. मतगणना केंद्रों पर ड्रोन और cctv कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न हो सके. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से Samajwadi Party के प्रत्याशी डॉ. संजय त्रिपाठी ने जीत का भरोसा जताया.

उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मतदान लगभग 9 से 10 प्रतिशत अधिक हुआ है. उनके मुताबिक, पिछले 18 से 20 वर्षों में शिक्षक हितों से जुड़े जिन मुद्दों को प्रमुखता से नहीं उठाया गया, उनमें पुरानी पेंशन की बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सम्मानजनक व्यवस्था प्रमुख हैं. डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने इन मुद्दों को चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुखता से उठाया. उनके अनुसार, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी पुरानी पेंशन और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति जताई थी. उन्होंने दावा किया कि इससे शिक्षक मतदाताओं के बीच भरोसा बढ़ा और बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान किया.

मतगणना से पहले सपा के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी सुशील कुमार ने प्रशासन से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और शुचिता बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि Government या किसी अन्य संस्था की ओर से किसी तरह का बाहरी दबाव चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहिए. उनके मुताबिक, प्रशासन अपने संवैधानिक दायित्वों का निष्पक्ष तरीके से निर्वहन करता है तो सपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित होगी.

वहीं, Lucknow स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह ने जीत का विश्वास जताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतपत्र भाजपा के पक्ष में पड़ेंगे. उन्होंने भगवान राम और हनुमान जी के आशीर्वाद से जीत मिलने की उम्मीद जताई.

गोरखपुर में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के लिए केंद्र पर मतगणना कर्मियों और विभिन्न दलों के एजेंटों की मौजूदगी रही. भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी भी मतगणना केंद्र पहुंचने के लिए रवाना हुए. वहीं, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना संजय कम्युनिटी हॉल में शुरू हुई, जहां 17 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है. यहां मतगणना स्थल से 100 मीटर की दूरी पर समर्थकों को रोकने की व्यवस्था की गई है. चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी को विजय जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी. विधान परिषद की इन 11 सीटों के निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश के 72 जिलों तक फैले हैं.

यही वजह है कि चुनाव के नतीजों को भाजपा और सपा दोनों के लिए Political रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भाजपा के सामने अपने प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ को बनाए रखने की चुनौती है, जबकि सपा शिक्षक तथा स्नातक वर्ग में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दल को विधानसभा चुनाव से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त जरूर मिल सकती है.

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विकेटी/एसके

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