नाबालिग को बाल सुधार गृह के बजाय जेल भेजने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को किया तलब

रांची, 28 अक्टूबर . रांची में छिनतई के एक मामले में 16 वर्षीय नाबालिग को बाल सुधार गृह के बजाय जेल भेजे जाने के प्रकरण में Jharkhand हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने Wednesday को Government और उसके अधिवक्ताओं के बीच समन्वय की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव को तलब किया. वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए. मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी.
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में सुनवाई के दौरान Governmentी पक्ष की ओर से मामले को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई गई. अदालत ने कहा कि इस संवेदनशील मामले में Government के अधिवक्ता अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पा रहे हैं. इससे Government और उसके विधिक प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी सामने आती है.
मुख्य सचिव ने अदालत को आश्वस्त किया कि न्यायालय की टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे और समन्वय की कमी दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे. उनके आश्वासन के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख तय की. साथ ही, अगली सुनवाई में मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने से छूट दे दी. यह मामला रांची के सदर थाना क्षेत्र में छिनतई की एक घटना से जुड़ा है.
याचिकाकर्ता महिला का आरोप है कि Police ने उनके 16 वर्षीय बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बाद में बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र सामने आने के बाद निचली अदालत के आदेश पर उसे डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह भेजा गया. इस मामले में किशोर की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राज्य Government से 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वेंकटेश कुमार पैरवी कर रहे हैं. उनका तर्क है कि नाबालिग को जेल भेजे जाने जैसे गंभीर मामले में राज्य Government की ओर से प्रभावी तरीके से पक्ष नहीं रखा जा रहा है.
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एसएनसी/पीएम


