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Friday, 16 October 2026
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यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लगाने का फैसला टला, दुकानदारों ने ली राहत की सांस, फिर लगाएंगे क्यूआर कोड

यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लगाने का फैसला टला, दुकानदारों ने ली राहत की सांस, फिर लगाएंगे क्यूआर कोड

New Delhi, 14 अक्टूबर . त्योहारी सीजन के बीच दुकानदारों के लिए राहत की खबर सामने आई है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूपीआई (यूपीआई) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है. यह शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना था, लेकिन अब इसे दीपावली के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. नई तारीख को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा. इस खबर से छोटे और बड़े दुकानदारों ने राहत की सांस ली है.

यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की खबर के बाद कई दुकानदारों में चिंता बढ़ गई थी. कुछ दुकानदार ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान लेने से बचने लगे थे, जबकि कुछ ने अपनी दुकानों से क्यूआर कोड हटाने शुरू कर दिए थे. कई दुकानदार नकद भुगतान की मांग कर रहे थे. उन्हें आशंका थी कि शुल्क लागू होने से उनके कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा.

अब शुल्क लगाने का फैसला टलने से दुकानदारों में खुशी का माहौल है. कई दुकानदारों का कहना है कि वे दोबारा अपनी दुकानों पर यूपीआई क्यूआर कोड लगाएंगे और ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराएंगे. त्योहारी सीजन में खरीदारी बढ़ने के बीच इस फैसले को कारोबार के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाने की बात कही गई थी. हालांकि, शुल्क लागू करने की समयसीमा टलने के बाद इसकी नई तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है.

दिल्ली के लाजपत नगर के एक दुकानदार ने कहा कि यूपीआई लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने से कारोबारियों को काफी फायदा हुआ है. त्योहारों के दौरान ग्राहक बिना किसी झिझक के यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं. इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहता है.

दुकानदार ने कहा कि Government का यह फैसला सकारात्मक है. हालांकि, अब यह देखना होगा कि आगे इस व्यवस्था को जारी रखने के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है.

दुकानदारों का कहना है कि यूपीआई आज देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से छोटे कारोबारियों और ग्राहकों पर असर पड़ सकता है. शुल्क लागू करने का फैसला टलने से दुकानदारों को राहत मिली है और वे त्योहारी सीजन में कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे.

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एसएके/एएस

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