
New Delhi, 26 सितंबर . यूपीआई एमडीआर को लेकर उपभोक्ताओं में चल रही चर्चा के बीच BJP MP प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि किसी भी सेवा के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने 0.40 प्रतिशत एमडीआर को कम बताते हुए कहा कि यह राशि Government के पास नहीं जाती, बल्कि टेक्नोलॉजी प्रदाताओं और बैंकों को मिलती है.
New Delhi में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि मेरा मानना है कि जब भी हम कोई सेवा लेते हैं तो हमें उस सेवा के लिए भुगतान करना चाहिए. 0.40 प्रतिशत का एमडीआर बहुत कम है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पैसा Government के पास नहीं जाता, बल्कि टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और बैंकों के पास जाता है.
उन्होंने कहा कि 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन के लिए रुपे डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है और उस पर कोई शुल्क नहीं लगता. दावा किया कि पिछले 10 वर्षों से एमडीआर नहीं लगाया गया है, लेकिन कुछ Political दल इस मुद्दे को विवाद बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.
टेक्नोलॉजी और व्यापार के बदलते स्वरूप पर BJP MP ने कहा कि देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इसमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है. कारोबार, पेशा या कोई अन्य क्षेत्र हो, आज तकनीक के प्रभाव से कोई भी अछूता नहीं है.
BJP MP ने एक ज्वेलरी प्रदर्शनी में दिए अपने संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में टेक्नोलॉजी में अपग्रेड, आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं. ऐसे में लगातार रिसर्च करते रहना जरूरी है, ताकि देश के व्यापारियों और कारोबारियों तक तकनीक से जुड़े नवीनतम अपडेट आसानी से पहुंचाए जा सकें. व्यापार के साथ-साथ ट्रेड एसोसिएशन के स्तर पर कौशल विकास पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. संबंधित क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना जरूरी है और विकसित India 2047 के संकल्प में देश के व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे विरोध पर प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और यह नियमों, कानूनों और कायदों के अनुसार काम करती है. अगर कोई विवाद या मतभेद होता है तो उसे सुलझाने के भी तरीके हैं. मेरा मानना है कि चुनाव आयोग निश्चित रूप से इस मामले पर संज्ञान लेगा.
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डीकेएम/डीकेपी