
न्यूयॉर्क, 25 सितंबर . संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में India ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न खतरों पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय तथा तटीय देशों की संप्रभुता की निरंतरता की वकालत की.
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ‘समुद्र के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरों से निपटने’ पर आयोजित उच्चस्तरीय पूर्ण बैठक में India का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सी लेवल राइज घोषणा को अपनाए जाने का स्वागत किया.
सिबी जॉर्ज ने कहा कि India तटीय क्षेत्रों की मजबूती, मैंग्रोव संरक्षण और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगातार काम कर रहा है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने में समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों एवं संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत की अहमियत दोहराई.
उन्होंने समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय व तटीय देशों की राज्य व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करना जरूरी है.
इससे पहले सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लिया. उन्होंने शांति निर्माण में राष्ट्रीय स्वामित्व की केंद्रीय भूमिका पर जोर देते हुए India के राष्ट्र निर्माण के अनुभव साझा किए. उन्होंने सत्ता के विकेंद्रीकरण, मानव-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और महिलाओं तथा युवाओं की भागीदारी पर आधारित समावेशी विकास को India की प्राथमिकता बताया.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, India ने अनुदान, रियायती ऋण और क्षमता निर्माण के माध्यम से विकासशील देशों, विशेषकर सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को व्यापक सहयोग दिया है. इसमें भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के जरिए भी सहायता प्रदान की जा रही है.
सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लिया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फिलिस्तीनी लोगों के प्रति India की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता का प्रतीक है और संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के साथ India की साझेदारी फिलिस्तीनी लोगों के दैनिक जीवन में ठोस और स्थायी बदलाव लाने के प्रयासों को दर्शाती है.
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डीएससी