
संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर . India ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में Pakistan के Prime Minister शहबाज शरीफ की बयानबाजी को ‘बेतुका’ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी. साथ ही, India ने दुनिया को याद दिलाया कि 25 साल पहले संयुक्त राष्ट्र से कुछ ही दूरी पर हुए 9/11 आतंकी हमले में Pakistan की भूमिका ‘भयावह’ थी.
Friday को शरीफ के भाषण का जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र में India की मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा कि शहबाज शरीफ ऐसी Government की ‘कठपुतली’ हैं, जो ‘सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए’ चल रही है.
उन्होंने कहा कि उनके कठपुतली नेता आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन इसमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असली फैसले कौन करता है. दिन में वे सुरक्षा की बात करते हैं और रात में आतंकवाद को अंजाम देते हैं.
गहलोत ने कहा कि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन Pakistan की सेना की प्रमुख सैन्य अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था. उसे अमेरिकी नेवी सील्स की टीम ने उसे Pakistan के एबटाबाद में पकड़ा था, जो Pakistan मिलिट्री अकादमी के पास स्थित है. और यही वह संस्था है, जिसके लिए आज Pakistan के प्रतिनिधि ने हमारे सामने इतनी श्रद्धा दिखाई. गहलोत का इशारा शरीफ के भाषण में फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर की बार-बार तारीफ करने की ओर था. उन्होंने कहा कि यह इसलिए भी असामान्य है, क्योंकि मुनीर कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं.
गहलोत ने कहा कि असल में मुनीर ही Pakistan के नेताओं का चुनाव करवाते हैं. उन्होंने कहा, “यह सब उसी बात को दिखाता है, जिसे खुद Pakistanी ‘फॉर्म 47 Government’ कहते हैं.”
‘फॉर्म 47’ चुनाव से जुड़ा एक दस्तावेज है. आरोप है कि 2024 के चुनाव में सेना ने इसमें हेरफेर कर शहबाज शरीफ को Prime Minister पद तक पहुंचाया. इसके बाद Pakistan में ‘फॉर्म 47’ शब्द शहबाज Government का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल होने लगा.
गहलोत ने कहा कि हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों पर ऐसे लोगों से उपदेश सुने, जिनकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों से सुरक्षा के लिए किले में बदल दी गई है. उन्होंने कहा कि Pakistan लोकतंत्र नहीं, बल्कि सेना के दबाव में चलने वाला देश है.
गहलोत ने Pakistan के 27वें संविधान संशोधन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह संशोधन ‘Pakistan के असली शासक’ असीम मुनीर को जीवनभर की कानूनी सुरक्षा देता है.
शहबाज शरीफ की ओर से India में धार्मिक असहिष्णुता के आरोपों पर भी गहलोत ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि आज हमने जिन लोगों की बातें सुनीं, उनका खुद का रिकॉर्ड कट्टरता और नफरत से भरा हुआ है.
उन्होंने कहा कि इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर ऐसे शासन की ओर से बातें की गईं, जिसकी व्यवस्था में ईशनिंदा कानूनों की अहम भूमिका है. Pakistan के ईशनिंदा कानूनों में मौत की सजा का प्रावधान है और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इन कानूनों का इस्तेमाल धार्मिक अल्पसंख्यकों को डराने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी किया जाता है.
गहलोत ने कहा कि दुनिया जानती है कि Pakistan में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार होता है. सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करके दुनिया को गुमराह नहीं किया जा सकता.
जम्मू-कश्मीर पर India का रुख साफ करते हुए गहलोत ने कहा, “India का केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर मेरे देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा.”
गहलोत ने शहबाज शरीफ के India के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए दावों को भी खारिज किया. ऑपरेशन सिंदूर India ने 26 भारतीयों की धार्मिक आधार पर की गई हत्या के जवाब में चलाया था. India के अनुसार इस हमले के पीछे Pakistan में मौजूद आतंकवादी संगठन और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा द रेजिस्टेंस फ्रंट था.
गहलोत ने कहा कि हमने पिछले साल दिखा दिया कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की. उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा.
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एवाई/एएस