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Friday, 30 October 2026
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‘यात्राएं निकालने में भाजपा माहिर’ भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ’ पदयात्रा पर विपक्ष का तंज

‘यात्राएं निकालने में भाजपा माहिर’ भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ’ पदयात्रा पर विपक्ष का तंज

New Delhi, 28 अक्टूबर . New Delhi से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने Wednesday को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व किया. इस पदयात्रा के दौरान सीएम रेखा गुप्ता के अलावा दिल्ली Government में मंत्री और BJP MP मौजूद रहे. इस यात्रा को लेकर विपक्ष ने निशाना साधते हुए कहा कि यात्रा निकालने में भाजपा माहिर है.

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने संवैधानिक संस्थाओं को अपने अधीन कर रखा है. यह लोकतंत्र को बचाने की बात करती है. जब भाजपा के लोग विपक्ष में थे तो इंदिरा गांधी के खिलाफ अराजकता फैलाते थे. आज विपक्ष अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी मांगों लेकर इस्तीफा मांग रहा है तो हमें यह अराजक करते हैं, जबकि वो खुद अराजक हैं.

एनसीपी (एसपी) के नेता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि यात्राएं निकालने में भाजपा माहिर है. इसकी शुरुआत लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 में की थी. यात्राओं के बलबूते ही वे सत्ता में आए हैं. यात्राएं निकालना सभी का अधिकार है. राहुल गांधी ने भी यात्रा निकाली थी, अब नितिन नवीन भी यात्रा निकाल रहे हैं, लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि यात्राओं के जरिए शांति और भाईचारे का संदेश जाना चाहिए, न कि नफरत का.

कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि अगर किसी ने लोकतंत्र की हत्या की है तो वह भारतीय जनता पार्टी है. अगर कोई अराजकता फैला रहा है तो वह भाजपा और उसके सहयोगी हैं.

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित रैली पर कहा कि लोकतंत्र की लूट हो रही है, उसी के खिलाफ हमारा आंदोलन है.

इसी बीच, सपा नेता योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि विधान परिषद के नतीजे और भी बेहतर हो सकते थे. लेकिन, जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी और राज्य के Chief Minister ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया, उन्होंने उन सभी गलत हथकंडों का इस्तेमाल किया जिन्हें भाजपा अक्सर अपनाती है. सभी जिलाधिकारियों, Police कप्तानों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों-चाहे वे जिला विद्यालय निरीक्षक हों या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, उनको काम पर लगा दिया गया. स्कूल प्रबंधकों और शिक्षकों को नोटिस भेजे गए, और चुनाव आयोग से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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डीकेएम/डीकेपी

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