
मेरठ, 1 सितंबर . भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में Tuesday को मेरठ में किसानों की महापंचायत आयोजित की गई. महापंचायत में किसानों से जुड़ी कई समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया. किसानों ने गन्ने के दाम बढ़ाने, बकाया भुगतान करने के साथ-साथ बिजली, खाद, भूमि अधिग्रहण और बाढ़ से होने वाले नुकसान का मुआवजा देने जैसी मांगें रखीं.
राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसानों के सामने इस समय कई मोर्चों पर समस्याएं हैं. बिजली की बढ़ती लागत और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने कहा कि जमीन के सर्किल रेट कम हैं, जबकि बिजली के रेट अधिक हैं. Government को किसानों की लागत और आमदनी के बीच बढ़ते अंतर पर ध्यान देना चाहिए. गन्ना किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि गन्ने के दाम में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है. उन्होंने मांग की कि गन्ने का भाव 500 रुपए प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है. खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर कपड़े और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन किसान की फसल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं. किसानों को कम से कम पिछले साल के मुकाबले चीनी के बढ़े हुए भाव का लाभ मिलना चाहिए. किसानों की समस्या लगातार बढ़ रही है और Government को उनकी आय तथा उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए फसलों के उचित दाम सुनिश्चित करने चाहिए.
आलू किसानों की समस्याओं को उठाते हुए टिकैत ने कहा कि आलू उत्पादक किसान भी नुकसान की स्थिति में हैं. खेती की लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. उन्होंने बिजली और खाद की उपलब्धता और कीमतों पर सवाल उठाए.
राकेश टिकैत ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि जमीन के मौजूदा सर्किल रेट बढ़ाए जाने चाहिए, ताकि किसानों को अधिग्रहण की स्थिति में उनकी जमीन का उचित मूल्य मिल सके. उन्होंने बिजली की दरों को कम करने की भी मांग की और कहा कि किसानों पर बिजली के बढ़ते खर्च का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
टिकैत ने खादर क्षेत्र में बाढ़ की समस्या का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि बाढ़ से किसानों की फसल और जमीन को नुकसान पहुंच रहा है. Government को प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए और बाढ़ से बचाव के लिए बांध जैसी स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए.
राकेश टिकैत ने दिल्ली में अमेरिका के साथ हो रही डील को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने दावा किया कि इस तरह के समझौतों का असर किसानों पर पड़ सकता है और Government को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से भारतीय किसानों के हित प्रभावित न हों. टिकैत ने कहा कि Government को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनमें किसान केंद्र में हों. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से किसानों को लाभ नहीं मिलेगा, तो फिर उनका औचित्य क्या है.
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पीएसके