महाराष्ट्र: नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया ध्वज स्तंभ पूजन और ध्वजारोहण

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर . India की President द्रौपदी मुर्मु Saturday को नासिक, Maharashtra में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुईं. इस अवसर पर उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम को भी संबोधित किया.
President द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि नासिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ की परंपरा जितनी प्राचीन है, उतनी ही समृद्ध भी है. हरिद्वार में गंगा तट पर, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर, उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर तथा नासिक में गोदावरी के तट पर आयोजित कुम्भ समागम पूरे विश्व में विख्यात हैं. सदियों से इन समागमों का निरंतर आयोजन, हमारे देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परम्पराओं की शक्ति का प्रमाण है.
President ने कहा कि सदियों से इन कुम्भ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना India की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता और परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है. ये मेले आस्था और सामाजिक समरसता के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा. उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि यह आयोजन हमारी युवा पीढ़ी को India की महान विरासत और इसके प्रमुख जीवन-मूल्यों से जोड़ने का एक बहुत अच्छा अवसर सिद्ध हो.
President ने कहा कि आज पूरे विश्व में अत्यन्त प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण, लोगों को अनेक संकटों का सामना करना पड़ रहा है. हमारे देश में भी, Maharashtra सहित कई क्षेत्रों में, सूखे की स्थिति के कारण, बहुत से लोग, विशेषकर हमारे किसान भाई-बहन, प्रभावित हुए हैं. केंद्र एवं राज्य Government पूरी तरह से प्रयासरत हैं कि इन समस्याओं का सामना करने में, देशवासियों को, विशेषकर किसानों को, सहायता प्राप्त हो.
स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के महत्व पर जोर देते हुए President ने सभी देशवासियों से पर्यावरण के संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से निरंतर प्रयास करते रहने का आग्रह किया. उन्होंने विश्वास जताया कि नासिक में होने वाले महाकुंभ के दौरान, मेला प्रबंधन के प्रयासों और जनभागीदारी के बल पर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे.
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एएसएच/डीकेपी


