महंत अवैद्यनाथ ने सामाजिक समता से हिंदू समाज को किया एकजुट: मुख्यमंत्री योगी

गोरखपुर, 30 सितंबर . उत्तर प्रदेश के Chief Minister एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने Wednesday को कहा कि हिंदू समाज की ताकत उसकी जीवंतता में है. उसमें अपनी विसंगतियों और विकृतियों के परिमार्जन की सामर्थ्य है. महंत दिग्विजयनाथ हिंदू समाज की एकता के लिए प्रचंड हिंदुत्व के वेग को आगे बढ़ाने के पक्षधर थे तो महंत अवैद्यनाथ ने बिखरी हिंदू ताकत को सामाजिक समता के आधार पर एकजुट करने के लिए जीवनभर प्रयास किया. सहभोज इसी अभियान का हिस्सा था.

Chief Minister योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित ‘सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह’ के अंतर्गत ‘राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पावन पुण्यतिथि’ विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे. Chief Minister योगी ने दोनों ब्रह्मलीन संतों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

सीएम योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में रामलला का प्रकटीकरण हुआ. बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सानिध्य में विश्व हिंदू परिषद ने राष्ट्रीय राम जन्मभूमि मुक्ति समिति बनाई तो महंत अवेद्यनाथ ने उसका नेतृत्व संभाला. संतों को साथ लेकर उन्होंने राम जन्मभूमि मुक्ति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. उन्होंने इसे गुरु परंपरा का विस्तार बताते हुए कहा कि समय, समाज और राष्ट्र की आवश्यकता के अनुरूप विचारों को आगे बढ़ाकर लोकोपयोगी बनाना महापुरुषों का गुण है. गोरक्षपीठ इसी चिंतन को आगे बढ़ाती रहेगी.

उन्होंने आगे कहा कि भारतीयता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थाएं महंत दिग्विजयनाथ की सोच थीं. महंत अवैद्यनाथ ने शिक्षा के विस्तार के साथ उसे स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया. बालिकाओं को पढ़ाई के साथ सिलाई-कढ़ाई जैसे कौशल सिखाने की भी उनकी चिंता थी. खेल प्रतिभाओं के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई. पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 1977 में प्रताप आश्रम और बाद में अन्य छात्रावास बने.

Chief Minister योगी ने कहा कि 23 से 29 सितंबर तक श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान-यज्ञ चला. इसके साथ देश, काल और समाज को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर वैचारिक संगोष्ठियां हुईं. देश के अलग-अलग हिस्सों से संत और विद्वान इसमें शामिल हुए. उन्होंने स्थिरता को जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र बताया और कहा कि जिन महापुरुषों की पूजा और गुणगान करते हैं, उनके गुणों को जीवन में उतारने का भी प्रयास होना चाहिए.

Rajasthan के विधायक महंत बालकनाथ ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ ने नाथ संप्रदाय और गोरक्षपीठ की पहचान देशभर में स्थापित की. Chief Minister योगी इस परंपरा को प्रखरता से आगे बढ़ा रहे हैं. आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के लोग उन्हें फिर Chief Minister बनाएंगे.

जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ के प्रयासों का परिणाम है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है. उन्होंने Chief Minister योगी के नेतृत्व में मथुरा और काशी को लेकर हिंदू समाज का सपना साकार होने की आकांक्षा जताई. साथ ही योगी आदित्यनाथ के तीसरी बार Chief Minister बनने और आगे देश की बागडोर संभालने की उम्मीद जताई.

कुशीनगर सांसद विजय दुबे ने कहा कि जब-जब सनातन समाज को बांटकर सत्ता प्राप्त करने का प्रयास हुआ, तब-तब गोरक्षपीठ ने सनातन विचारधारा को मजबूत किया. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को पांच सौ वर्षों की प्रतीक्षा के फलीभूत होने से जोड़ा. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह ने कहा कि दोनों ब्रह्मलीन संतों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से पूर्वांचल में शिक्षा की अलख जगाई और सामाजिक एकता का संदेश दिया.

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि संत का प्रभाव आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता. दोनों संतों ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और कर्तव्यबोध का आधार बनाया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के प्रांत संघचालक महेंद्र अग्रवाल ने दोनों संतों का जीवन लोककल्याण को समर्पित बताते हुए कहा कि गोरक्षपीठ और संघ के विचारों में हमेशा सामंजस्य रहा.

महापौर मंगलेश श्रीवास्तव ने शिक्षा के क्षेत्र में दोनों संतों के योगदान को अनुकरणीय बताया. कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं की सरस्वती वंदना से हुई. डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने वैदिक मंगलाचरण, मृत्युंजय उपाध्याय व गौरव तिवारी ने गोरक्ष अष्टक और डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने महंत अवेद्यनाथ स्तोत्र प्रस्तुत किया. President पुरस्कार से सम्मानित बाबू रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘जटायु’ का विमोचन भी हुआ.

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विकेटी/एसके

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