महंगाई और कमजोर आर्थिक वृद्धि से बांग्लादेश पर बढ़ा स्टैगफ्लेशन का खतरा: रिपोर्ट

New Delhi, 11 अक्टूबर . बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन यानी महंगाई के साथ आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार का दबाव बढ़ता जा रहा है. लगातार ऊंची महंगाई, कमजोर आर्थिक वृद्धि, निजी निवेश में सुस्ती और परिवारों की घटती क्रय शक्ति ने देश की आर्थिक चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने इन समस्याओं को पैदा नहीं किया है, बल्कि पहले से मौजूद आर्थिक कमजोरियों को और बढ़ा दिया है.

ढाका स्थित समाचार पत्र द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में स्टैगफ्लेशन की स्थिति को समझने के लिए श्रम बाजार की वास्तविक परिस्थितियों पर भी ध्यान देना जरूरी है. परंपरागत रूप से स्टैगफ्लेशन का अर्थ ऊंची महंगाई के साथ आर्थिक ठहराव और बेरोजगारी से है. हालांकि, बांग्लादेश में आधिकारिक बेरोजगारी के आंकड़े अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर अल्परोजगार, अनियमित कामकाज और कम उत्पादकता वाली नौकरियां श्रम बाजार की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, परिवहन और आयात की लागत बढ़ा दी है. इससे बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि भू-Political तनाव कम होने और तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद भी देश की आर्थिक समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं होंगी.

विशेषज्ञों के अनुसार, निजी निवेश की कमजोरी, बैंकिंग क्षेत्र पर बढ़ता दबाव, नियामकीय अनिश्चितता और कारोबारियों के घटते भरोसे जैसी संरचनात्मक समस्याएं बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की राह में बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं.

बांग्लादेश में महंगाई अब भी प्रमुख आर्थिक चिंताओं में शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में समग्र महंगाई दर अगस्त में मामूली रूप से घटकर 8.26 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 8.32 प्रतिशत थी. हालांकि, इसी दौरान गैर-खाद्य महंगाई बढ़कर 9.32 प्रतिशत पर पहुंच गई.

वेतन वृद्धि की रफ्तार भी महंगाई के मुकाबले कमजोर बनी हुई है. अगस्त के दौरान वेतन वृद्धि लगभग 8.05 प्रतिशत रही, जो समग्र महंगाई दर से कम है. इसके कारण लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति लगातार प्रभावित हो रही है.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं की बढ़ती लागत से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है. इसका असर विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है. खर्च बढ़ने के कारण इन परिवारों की अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करने की क्षमता भी कमजोर हो रही है, जिससे उपभोक्ता मांग प्रभावित हो सकती है.

रिपोर्ट में बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि को लेकर भी चिंता जताई गई है. विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया है. हालांकि, ये अनुमान आर्थिक विकास की सकारात्मक दर की ओर संकेत करते हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इतनी धीमी वृद्धि से पर्याप्त उत्पादक रोजगार पैदा करना, लोगों की आय बढ़ाना और निजी निवेश को गति देना मुश्किल हो सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश के सामने चुनौती केवल महंगाई को नियंत्रित करने की नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास को मजबूत बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने की भी है. जब तक इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक वैश्विक परिस्थितियों में सुधार के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन का दबाव बना रह सकता है.

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डीएससी

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