
New Delhi, 11 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi की ओर से Friday को सुभाषित संग्रह ‘सुभाषितरत्नभाण्डागारम्’ का एक श्लोक, “सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्. सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किंचिदाचरेत्॥” social media पर साझा किया गया है.
पीएम मोदी की ओर से social media पर लिखा गया, “अगले कुछ दिनों में दुनियाभर के नेता ब्रिक्स समिट के लिए जुटेंगे. पूर्ण विश्वास है कि सम्मेलन में विश्व कल्याण की कामना के साथ विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी.”
‘सुभाषितरत्नभाण्डागारम्’ के श्लोक, “सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्. सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किंचिदाचरेत्॥” का हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को सदैव सज्जनों के साथ रहना और उन्हीं की संगति करनी चाहिए. सज्जनों के साथ ही विचार-विमर्श और मैत्रीपूर्ण व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि परस्पर सद्भाव, संवाद और मैत्रीपूर्ण संबंध शांति तथा सहयोग को सुदृढ़ करते हैं.
यह संस्कृत श्लोक (सुभाषित) हमें अच्छे लोगों (सज्जनों) की संगति करने और बुरे लोगों (दुष्टों) से दूर रहने की प्रेरणा देता है. इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि हम जिन लोगों के बीच रहते हैं, हमारी सोच और आचरण वैसा ही बन जाता है. अच्छे लोगों के साथ रहने से हमारे अंदर अच्छे संस्कार, विचार और नैतिकता आती है.
इस सुभाषित के माध्यम से कहा गया है कि अगर किसी सज्जन या ज्ञानी व्यक्ति से मतभेद या विवाद हो भी जाए, तो भी उससे कुछ सीखने को मिलेगा, क्योंकि उसका दृष्टिकोण विवेकपूर्ण होता है. वहीं, इसके विपरीत दुष्ट व्यक्ति के साथ वाद-विवाद करने से केवल मानसिक शांति भंग होती है, इसके अलावा कुछ हासिल नहीं होता है.
सुभाषित में कहा गया है कि दुष्ट या बुरे स्वभाव वाले लोगों की संगति विनाशकारी होती है. ऐसे लोगों के साथ मित्रता तो दूर की बात है, ऐसे लोगों से किसी भी तरह का लेन-देन या संपर्क भी नुकसानदायक साबित होता है. इस लिए ऐसे लोगों के साथ किसी भी प्रकार का व्यवहार न करने का सुझाव दिया गया है.
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एसडी/एएस