मध्य प्रदेश के ओबीसी मामले को लेकर दायर की गई एसएलपी: सीएम मोहन यादव

Bhopal , 16 अक्टूबर . Madhya Pradesh में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दायर की गई है. Chief Minister मोहन यादव ने कहा है कि Government अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए नीति और नीयत साफ है.
Chief Minister यादव से Friday को ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि मंडलों ने Chief Minister निवास स्थित समत्व भवन में भेंट की. Chief Minister यादव ने कहा है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है. राज्य Government ओबीसी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. न्याय संगत और तार्किक व्यवस्था के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं.
इसी उद्देश्य से ओबीसी आरक्षण के विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई और ओबीसी के सभी संगठनों से वार्ता कर मजबूती के साथ उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा गया था. उन्होंने आगे कहा कि राज्य Government इस विषय को टालने की दृष्टि से नहीं अपितु उसका समुचित हल निकालने के उद्देश्य से कार्य कर रही है. अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण पर राज्य Government की नीति और नीयत स्पष्ट है.
Chief Minister यादव ने बताया कि ओबीसी आरक्षण के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का बिंदुवार अध्ययन कर सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख राज्य Government की ओर से मजबूती से अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं. इस क्रम में महाधिवक्ता कार्यालय मध्य प्रदेश द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन), स्टेट ऑफ एमपी वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य दायर कर दी गई है.
सीएम मोहन यादव को प्रतिनिधि मंडलों ने मप्र में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर उच्च न्यायालय के 9 अक्टूबर के निर्णय के संबंध में अद्यतन आंकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान करने तथा ओबीसी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के संबंध में ज्ञापन सौंपा.
Chief Minister यादव से ओबीसी महासभा दिल्ली ने एडवोकेट वैभव सिंह, इंजीनियर महेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में तथा ओबीसी महासभा ग्वालियर ने महासभा के संस्थापक विजय कुमार, प्रदेश प्रभारी जीतू लोधी और प्रदेशाध्यक्ष गिरिराज धाकड़ के नेतृत्व में अपने-अपने पक्ष रखे.
दरअसल, वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस की Government ने ओबीसी आरक्षण को 14 से बढ़कर 27 प्रतिशत करने का अध्यादेश लाया था. इस अध्यादेश को चुनौती दी गई और हाल ही में उच्च न्यायालय ने इस फैसले को रद्द कर दिया है.
इस मामले को लेकर राज्य की सियासत गरमाई हुई है. भाजपा जहां कांग्रेस के शासनकाल में कमजोर अध्यादेश लाने का आरोप लगा रही है वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने पिछड़ों के साथ धोखा किया है.
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एसएनपी/एएसएच


