भारत में हो रहे प्रदर्शनों की फंडिंग के पीछे अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस, गायिका मैरी मिलबेन ने लगाया आरोप

वाशिंगटन, 16 अक्टूबर . अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने India में चल रहे प्रदर्शनों की फंडिंग को लेकर अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस का नाम लिया है. उन्होंने यह बात एक वीडियो संदेश में कही, जिसे उन्होंने India के युवाओं को संबोधित करते हुए जारी किया. इस दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की भी आलोचना की.
मिलबेन ने कहा कि उनसे बार-बार यह सवाल पूछा जा रहा था कि India में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे फंडिंग कौन कर रहा है. इसके जवाब में उन्होंने कहा, “वही व्यक्ति या वही समूह, जो दुनिया भर में ऐसे कई प्रदर्शनों को फंड करता है, खासकर तब जब किसी देश में कोई रूढ़िवादी (कंजर्वेटिव) नेता सत्ता में हो. उसका नाम जॉर्ज सोरोस है. उनके नेटवर्क से जुड़े लोग दुनिया के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शनों और अशांति को फंड करते रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है. मिलबेन ने दावा किया कि अभिजीत दिपके ने social media पर खुद कहा था कि उन्हें जॉर्ज सोरोस से आर्थिक मदद मिलती है. हालांकि, उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया.
यह बयान उनके Wednesday को किए गए ‘एक्स’ पोस्ट से आगे का कदम माना जा रहा है. उस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि सीजेपी को अमेरिका के कुछ चुनिंदा दानदाताओं से फंडिंग मिल रही है, लेकिन तब उन्होंने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया था.
दिपके को सीधे संबोधित करते हुए मिलबेन ने कहा, “दिपके, मैं आपसे सीधे बात कर रही हूं. आपके पास लोगों को जोड़ने और अपनी बात रखने की क्षमता है. अगर आप इस प्रतिभा का इस्तेमाल सकारात्मक कामों के लिए करें, तो India में एक प्रभावशाली ताकत बन सकते हैं.”
उन्होंने दिपके को सलाह दी कि वे Prime Minister और देश के नेतृत्व से मिलकर अपने विचार रचनात्मक तरीके से रखें. जब यह विरोध-प्रदर्शन का दौर खत्म हो जाएगा, तब लोग आपको याद नहीं रखेंगे.
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि राहुल गांधी और दिपके ऐसा नेतृत्व नहीं दिखाते, जो Government के साथ मिलकर काम करना चाहता हो. उनके अनुसार, “राहुल गांधी और दिपके देश में एकता लाने के बजाय विरोध-प्रदर्शनों को आगे बढ़ा रहे हैं. वे किसी तरह का ठोस समाधान भी नहीं दे रहे हैं.”
मिलबेन ने कहा कि India में चल रहे ये प्रदर्शन उन्हें ठोस मुद्दों पर आधारित नहीं लगते. उन्होंने इन प्रदर्शनों की तुलना अमेरिका में हुए ‘एंटीफा’, ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ और कुछ ऐतिहासिक स्मारकों को हटाने के खिलाफ हुए आंदोलनों से की.
इसके विपरीत उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चलाया, जिससे अमेरिका में नागरिक अधिकार कानून और मतदान अधिकार कानून जैसे बड़े बदलाव आए.
मिलबेन ने कहा, “मार्टिन लूथर किंग जूनियर कभी भी अराजकता, हिंसा या भ्रम फैलाने वाले आंदोलन का नेतृत्व नहीं करना चाहते थे. उन्हें साफ पता था कि अमेरिका में क्या बदलाव चाहिए और उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध किया.”
Prime Minister मोदी की प्रशंसा करते हुए मिलबेन ने उन्हें दुनिया के सबसे बेहतर नेताओं में से एक बताया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष, Prime Minister के रूप में 12 वर्ष और लगातार तीन बार मिली जीत उनके नेतृत्व पर जनता के भरोसे को दिखाती है.
चुनाव में धांधली के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “यह चुनावी धोखाधड़ी नहीं है. यह उस नेता पर लोगों के भरोसे की ताकत है.” मिलबेन ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया नहीं जाएगा और Prime Minister मोदी भी कहीं नहीं जा रहे हैं. अगर कुछ होगा तो पीएम मोदी 2029 में फिर से चुने जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा विपक्षी आंदोलन ज्यादा समय तक नहीं चलेगा.
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एवाई/एबीएम


