भारत में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में होना चाहिए : धीरेंद्र शास्त्री

New Delhi, 24 अगस्त . जापान दौरे पर पहुंचे बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि India में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं बल्कि विचारों में होना चाहिए. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल: सब लोग बोलते हैं कि हिन्दू राष्ट्र संविधान के खिलाफ है? इसके बारे में आप क्या बोलना चाहेंगे?”

जवाब: हम India में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में चाहते हैं. विचार परिवर्तन से कार्य परिवर्तन होगा. विचार परिवर्तन से राष्ट्र परिवर्तन होगा. हमारी हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना वैचारिक है, कागजी नहीं है.

सवालः हिंदू राष्ट्र बनाने में समस्या क्या है?

जवाबः हिंदू राष्ट्र हमें बनाने के लिए समस्या कुछ भी नहीं है. हमें बच्चों, बूढ़ों, वृद्धों और प्रत्येक भारतीय के दिल में भारतीय परंपरा सनातन संस्कृति को भरना है. बस ये सर्वव्यापक रूप से स्वीकारोक्ति हो जाए और सभी संस्कारवान, विचारवान, प्रज्ञावान, मेधावान, बलवान, बुद्धिमान बन जाएं, यही समस्या है.”

सवाल: हिन्दू समाज की सबसे ज्यादा समस्या क्या है?

जवाब: हिन्दू समाज की सबसे बड़ी समस्या क्षेत्रवाद, जातिवाद और उसके बाद में फिर प्रदेशवाद है.”

सवाल: सुबह उठकर जेन जी इंस्टाग्राम खोलते हैं. इसको लेकर क्या बोलना चाहेंगे आप?”

जवाब: ठीक है, वो चलाना चाहिए. सदुपयोग के लिए ठीक है, दुरुपयोग के लिए खराब. social media पर एक्टिव रहना ठीक है, लेकिन सदुपयोग के लिए. अच्छे संस्कार सीखे जाएं, कम टाइम स्क्रीन पर दिया जाए, रील से ज्यादा रियल पर भरोसा किया जाए. केवल वायरल होने का बुखार ना चढ़ाया जाए. लाइफ में दौड़-भाग ही जरूरी नहीं है, लाइफ में पेशेंस (धैर्य) भी बहुत जरूरी है, लाइफ में हैप्पीनेस (खुशी) भी बहुत जरूरी है. रील, इंस्टाग्राम चलाना बुरा नहीं पर अत्यधिक चलाना, दुरुपयोग करना बुरा है.”

सवाल: India को जापान से क्या सीखना चाहिए?”

जवाब: India को भी बहुत कुछ सीखना चाहिए जापान की कल्चर. जापान की नियम-पद्धति, जापान का सिस्टम, जापान का इन्फ्रास्ट्रक्चर, जापान के लोगों का हैप्पीनेस, लॉन्ग लाइफ, बॉडी के प्रति बहुत सतर्क रहना. जापान में क्षेत्रवाद और जातिवाद नहीं है, यहां राष्ट्रवाद है.”

सवाल: जापान को India से क्या सीखना चाहिए?

जवाब: जापान को India से युवाओं की संस्कृति को बढ़ावा देना सीखना चाहिए. जापान को India से अनेकता में एकता सीखनी चाहिए. जापान को एक चीज जो सीखने योग्य है, वो है आध्यात्मिकता.”

सवाल: आज अगर कोई जेन जी बोले कि अगर मेरे सामने प्रूफ नहीं है तो मैं भगवान पर विश्वास नहीं करूंगा, उस बारे में क्या बोलना चाहेंगे आप?”

जवाब: दुनिया में सब कुछ प्रूफ होता नहीं है. दुनिया में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो बिना प्रूफ के होती हैं. दुनिया में जो दिखती नहीं है तो जरूरी नहीं कि वो ना हो. हवा दिखती नहीं है, पर है तो. वैसे ही परमात्मा दिखता नहीं पर है तो. किसी ने यदि अमेरिका नहीं देखा तो इसका मतलब ये नहीं कि अमेरिका नहीं है. जरूरी नहीं है कि देखने पर ही जोर दिया जाए क्योंकि परमात्मा देखने का विषय नहीं है, परमात्मा अनुभव का विषय है, वो भी अपने भीतर.”

सवाल: जापान में आकर आपको क्या अनुभूति हो रहा है?”

जवाब: भारत, India है, सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा, इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन जापान आकर के हमें यहां की टेक्नोलॉजी और यहां का इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत अच्छा लगा. इनकी सोच बहुत अच्छी है और सरल, हम्बल (विनम्र) और नियम पर जीने वाले लोग हैं. हम संपूर्ण जापान, जापान Government और जापान के निवासियों को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं.”

सवाल: अगर हनुमान जी से आपको कुछ मांगना है India को बदलने के लिए, तो क्या मांगेंगे आप?”

जवाब: शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार.

ओपी/पीएम

Leave a Comment