भारत ने सिंधु जल संधि पर ‘सीओए’ के फैसले को किया खारिज, कहा- फैसला स्वीकार नहीं

New Delhi, 31 अगस्त . India ने एक बार फिर आईडब्ल्यूटी यानी सिंधु जल संधि को लेकर तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (सीओए) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने स्पष्ट कहा कि वो इस निकाय की वैधता को नहीं मानता है, इसलिए फैसले को स्वीकार नहीं करता है.

Monday को एमईए ने इस मुद्दे पर बयान जारी किया. साफ शब्दों में कहा गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ ने ‘सिंधु जल संधि’ के तहत अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति के बारे में अपना फैसला (जिसे उसने ‘अवार्ड’ कहा है) सुनाया है.

यह तथाकथित कोर्ट विश्व बैंक के संधि की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हुए बनाया गया था. India इसके तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने इस गैर-कानूनी संस्था के पहले के सभी फैसलों को सख्ती से खारिज किया है.

आगे लिखा है कि India ने कभी भी गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई इस तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के कानूनी अस्तित्व को मान्यता नहीं दी है. India का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि इस तथाकथित आर्बिट्रल संस्था का गठन ही ‘सिंधु जल संधि’ का गंभीर उल्लंघन है. इसलिए, India कभी भी इस संस्था के सामने पेश नहीं हुआ और न ही उसने इसके पहले के फैसलों को तवज्जो दी.

India का मत है कि इस तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ को देश के संप्रभु फैसलों पर कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. इसके फैसलों का, चाहे अभी हों या भविष्य में, India द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े India के कामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. साथ ही ‘सिंधु जल संधि’ को स्थगित रखने का India का निर्णय लागू रहेगा.

पहलगाम की बैसरन घाटी में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले के बाद से ही India ने संधि को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था. Pakistan की विचारधारा के खिलाफ देश अपने रुख पे कायम है. स्पष्ट कह चुका है कि ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते.’

केआर/

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