भारत की सहयोग की नीति, अफ्रीका के साथ विकास साझेदारी सबसे अहम : जयशंकर

अबिदजान, 8 अक्टूबर . India और अफ्रीका के बीच विकास सहयोग की अहमियत पर जोर देते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि India की नीति हमेशा अपने अफ्रीकी साझेदार देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने की रही है.

कोटे डी आइवर में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए जयशंकर ने Prime Minister Narendra Modi की ओर से आठ साल पहले बताए गए ‘कंपाला सिद्धांतों’ का जिक्र किया.

उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों ने अफ्रीका के साथ India के रिश्तों और सहयोग की दिशा तय की है.

विदेश मंत्री ने कहा, “अफ्रीका के साथ हमारे जुड़ाव में विकास साझेदारी हमेशा से अहम रही है. हमारी सोच यह रही है कि India जो भी सहयोग करे, वह हमारे अफ्रीकी साझेदारों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के हिसाब से होना चाहिए. आठ साल पहले Prime Minister मोदी ने अफ्रीका के साथ हमारे रिश्तों को लेकर जिन ‘कंपाला सिद्धांतों’ की बात की थी, उनका मुख्य संदेश भी यही था.”

उन्होंने कहा कि इसमें आईटीईसी की भूमिका काफी अहम है, क्योंकि इसके जरिए India अपने विकास, सुरक्षा और शासन से जुड़े अनुभव और बेहतर कामकाजी तरीके दूसरे देशों के साथ साझा करता है. इसके अलावा, तकनीक और विशेषज्ञता पर भी साथ मिलकर चर्चा की जाती है.

जयशंकर ने कहा कि यह सिर्फ India के अनुभव दूसरे देशों के साथ साझा करने का जरिया नहीं है, बल्कि India भी साझेदार देशों से आने वाले लोगों से बहुत कुछ सीखता है. आईटीईसी के प्रतिभागी India में जिन संस्थानों में जाते हैं, उन संस्थानों को भी उनके अनुभव और मौजूदगी से फायदा होता है.

विदेश मंत्री ने बताया कि इस साल आईटीईसी कार्यक्रम के 62 साल पूरे हो रहे हैं. इसकी शुरुआत 1964 में हुई थी और समय के साथ यह दूसरे देशों के साथ क्षमता निर्माण और सहयोग बढ़ाने के लिए India के सबसे अहम कार्यक्रमों में से एक बन गया है.

उन्होंने कहा कि आज आईटीईसी कार्यक्रम 160 से ज्यादा साझेदार देशों तक पहुंच चुका है. इसके तहत हर साल अलग-अलग क्षेत्रों में करीब 10 हजार लोगों को पूरी तरह फंडेड ट्रेनिंग दी जाती है.

जयशंकर ने कहा, “आज आईटीईसी के तहत आईसीटी और डिजिटल गवर्नेंस से लेकर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, बैंकिंग, फाइनेंस, कृषि, ऊर्जा और स्किल डेवलपमेंट तक कई क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले से जुड़ी ट्रेनिंग भी इसका हिस्सा है. इसका मकसद एक ऐसा पूरा पैकेज तैयार करना है, जिससे हमारे साझेदार देशों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा किया जा सके.”

India और कोटे डी आइवर के पुराने और दोस्ताना रिश्तों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि क्षमता निर्माण दोनों देशों की साझेदारी का एक अहम हिस्सा रहा है. पिछले 12 वर्षों में कोटे डी आइवर ने करीब 800 आईटीईसी स्लॉट का इस्तेमाल किया है.

उन्होंने कहा कि यह मानव संसाधन में एक बड़ा निवेश है. इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि इसके जरिए दोनों देशों के बीच लंबे समय के रिश्ते तैयार किए जा रहे हैं.

जयशंकर ने कहा, “आज हमें यह बताते हुए खुशी है कि रक्षा क्षेत्र में 123 स्लॉट और नागरिक क्षेत्रों में 100 स्लॉट देने की प्रतिबद्धता है. इन नियमित आदान-प्रदान को हम बहुत अहम मानते हैं. आखिर में संपत्तियां बनाई जा सकती हैं और लोग एक-दूसरे के देशों की यात्रा कर सकते हैं, लेकिन इन कोर्स के जरिए जो आपसी जुड़ाव, भावनाएं, अनुभव और यादें बनती हैं, वही किसी रिश्ते की असली ताकत होती हैं.”

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एवाई/एबीएम

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