भारत की रणनीति ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिलाई बड़ी कूटनीतिक जीत: रिपोर्ट

New Delhi, 13 सितंबर . India की व्यापक रणनीति (ग्रैंड स्ट्रैटेजी) ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बड़ी कूटनीतिक सफलता दिलाई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, India ने सदस्य देशों के विविध हितों के बीच संतुलन बनाते हुए बहुपक्षवाद को व्यावहारिक दिशा दी और दुनिया को अपने रणनीतिक उभार का स्पष्ट संदेश दिया.

‘इंडिया नैरेटिव’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि New Delhi ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ऐसी रणनीति अपनाई, जिससे यह मंच भू-Political टकराव या रूस और चीन जैसी बड़ी शक्तियों के प्रभाव की प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बनने से बचा रहा.

रिपोर्ट के मुताबिक, India की रणनीति तीन प्रमुख बदलावों पर आधारित रही. पहला, बहुपक्षवाद को व्यावहारिक बनाते हुए वैश्विक शासन संस्थाओं और ढांचों में सुधार को आगे बढ़ाना. दूसरा, ब्रिक्स को सहयोग और लचीलापन बढ़ाने वाले रणनीतिक मंच के रूप में मजबूत करना. तीसरा, वैश्विक संकटों से निपटने के लिए India को टिकाऊ और रणनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने वाले प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सुरक्षा को विविधीकरण तथा समावेशिता के जरिए मजबूत करना शामिल है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्दे के पीछे चली गहन बातचीत ने India की “स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन” और “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” की नीति को प्रभावी ढंग से सामने रखा. India ने डी-हाइफनेशन के जरिए ब्रिक्स को संघर्षों और भू-Political प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक एजेंडे पर केंद्रित रखा, जबकि रणनीतिक स्वायत्तता के माध्यम से विभिन्न देशों के हितों में सामंजस्य स्थापित करते हुए आर्थिक सहयोग को केंद्र में रखा.

रिपोर्ट के अनुसार, इसी रणनीतिक संतुलन ने Political मतभेदों के बीच भी आम सहमति बनाने में मदद की और ग्लोबल साउथ की आवाज को संयुक्त घोषणा पत्र में प्रमुखता दिलाई. इससे पहले जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी India ने रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में इसी रणनीति का सफल इस्तेमाल किया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिखर सम्मेलन से पहले आशंका जताई जा रही थी कि संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति नहीं बन पाएगी, लेकिन India ने राष्ट्रीय और वैश्विक हितों के बीच संतुलन बनाते हुए सहमति सुनिश्चित की. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल में India द्वारा एससीओ घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद ब्रिक्स घोषणा पत्र में ईरान पर सैन्य हमलों की कड़ी निंदा और एकतरफा पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना भी शामिल की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, India की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता आतंकवाद के मुद्दे पर रही. ब्रिक्स घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई और अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए Pakistan समर्थित आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि घोषणा पत्र में पहलगाम हमले की “सबसे कड़े शब्दों में” निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर भी चिंता जताई गई. साथ ही आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को खारिज करते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई गई.

डीएससी

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