ब्रिक्स के मंच से पीएम मोदी की ‘सरपंच’ वाली कूटनीति की गूंज, जगविंदर विरक बोले- भारत शांति का प्रतीक

New Delhi, 13 सितंबर . ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के बीच India की रक्षा तैयारियों और विदेश नीति को लेकर बड़ी चर्चा छिड़ गई है. रूस की ओर से India को एडवांस्ड सुखोई एसयू-57 विमान का ऑफर दिए जाने की खबरों पर रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेनाएं मजबूत हुई हैं, लेकिन देश को अभी भी लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है.

वहीं, ऑस्ट्रेलिया-India रणनीतिक गठबंधन के चेयरमैन जगविंदर सिंह विरक ने कहा कि India हमेशा से शांति का प्रतीक रहा है और Prime Minister Narendra Modi ने ‘सरपंच’ की भूमिका निभाते हुए दुनिया को एकजुट करने का काम किया है.

रूस के एडवांस्ड सुखोई एयरक्राफ्ट के ऑफर पर रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने कहा, “आपको पता होना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद India की रक्षा सेनाएं काफी मजबूत हो गई हैं, लेकिन कोई भी देश अपनी उपलब्धियों पर बैठा नहीं रहता. हर देश अपनी सुरक्षा को लगातार बढ़ाता रहता है, क्योंकि कोई नहीं जानता कि कल क्या हो सकता है.”

उन्होंने आगे कहा कि स्थिति यह है कि हमें लड़ाकू विमानों की जरूरत है. 114 राफेल पाइपलाइन में हैं, लेकिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि फ्रांस हमें उसका सॉफ्टवेयर नहीं दे सकता, इसलिए कहा जा रहा है कि रूस ने एसयू-57 को लेकर चर्चा की है. यह मीडिया में भी आया है. India ने पहले ही एसयू-57 में पैसा लगाया था और हम रूस के साथ मिलकर इसे संयुक्त रूप से विकसित कर रहे थे, तो यह पूरी तरह से नई बात नहीं है, इसकी पूरी संभावना है.

रूस के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों के बीच India के रणनीतिक संतुलन पर रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि India और रूस के बीच जो समझौते और चर्चाएं होती हैं, वह मजबूत और भरोसेमंद संबंधों को दर्शाती हैं. हमें तेल, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु पनडुब्बियों, एस-400 सिस्टम और एसयू-30 विमानों समेत कई क्षेत्रों में उनकी मदद से काफी फायदा हुआ है. साथ ही, हमने अमेरिका और यूरोपीय देशों समेत अन्य देशों के साथ भी सहयोग किया है, जिसे रणनीतिक स्वायत्तता कहा जाता है.

उन्होंने कहा कि चीन ने भी यह माना है कि India को इस रणनीतिक स्वायत्तता की नीति से फायदा हुआ है. नतीजतन, इस बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि चीन के President शी जिनपिंग ने सीमा मुद्दे को सुलझाने की मंशा जताई, और इस बात पर जोर दिया कि सीमा विवाद को निपटाया जाना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल हाल ही में चीन गए थे, उन्होंने ‘अर्ली हार्वेस्ट’ का जिक्र किया था, जिसका मतलब है कि जो प्रयास किए गए हैं, उनका फल मिलने वाला है.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में ऑस्ट्रेलिया India रणनीतिक गठबंधन के चेयरमैन जगविंदर सिंह विरक ने कहा, “India हमेशा से युद्ध के खिलाफ रहा है. पीएम मोदी ने हर मंच पर कहा कि हम युद्ध के खिलाफ हैं. India दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने हमेशा अपनी रक्षा की है. India का सिद्धांत और रणनीति हमेशा एक जैसे रहे हैं. जहां कहीं भी कुछ हुआ है, India ने उसका विरोध किया है और कहा है कि हम शांति के प्रतीक हैं.”

जगविंदर सिंह विर्क ने कहा कि यह एक बहुत अच्छी पहल है. पीएम मोदी ने दिखाया है कि वे ‘सरपंच’ की भूमिका निभा रहे हैं, जैसा कि हम पंजाबी या हिंदी में कहते हैं. Prime Minister मोदी ने ‘सरपंच’ की भूमिका बहुत अच्छे से निभाई है. 21 देशों के Presidentयों और प्रधानमंत्रियों को एक जगह इकट्ठा करना और यह कहना कि हम सब मिलकर काम करेंगे.

इसके अलावा, ब्रिक्स समिट को लेकर Maharashtra के मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा, “ब्रिक्स शिखर सम्मेलन देश के विकास के लिए एक बहुत जरूरी पहल है. जिस तरह से यहां कार्यक्रम आयोजित किया गया, मैं आज यहां Maharashtra Government की तरफ से आया हूं. Maharashtra में सबसे ज्यादा निवेश आया है. Maharashtra की अर्थव्यवस्था देश में सबसे मजबूत है और हम Maharashtra Government की तरफ से एक रोडमैप तैयार कर रहे हैं.”

केके/डीकेपी

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