भारत और कतर ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने एवं बढ़ाने के तरीकों पर की चर्चा

दोहा, 10 सितंबर . कतर में India के नए राजदूत श्रीकर रेड्डी ने Thursday को विदेश राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल मुरैखी को अपने नियुक्ति पत्र की प्रति सौंपी और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की.

कतर स्थित भारतीय दूतावास ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया, “कतर में India के राजदूत डॉ. के श्रीकर रेड्डी ने सुल्तान बिन साद अल मुरैखी, विदेश राज्य मंत्री से मुलाकात की और नियुक्ति पत्र की प्रति प्रस्तुत की. राजदूत ने India के नेतृत्व की ओर से शुभकामनाएं दीं और दोनों ने भारत-कतर संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के उपायों को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया.”

बता दें कि राजदूत रेड्डी Saturday को दोहा पहुंचे थे, जहां प्रभारी राजदूत संदीप कुमार और प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम यूसुफ फखरो ने उनका स्वागत किया.

भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर कहा, “कतर में India के नामित राजदूत डॉ. श्रीकर रेड्डी Thursday को दोहा पहुंचे. प्रभारी राजदूत संदीप कुमार राजदूत इब्राहिम यूसुफ फखरो, और प्रोटोकॉल निदेशक के साथ डॉ. रेड्डी के स्वागत में शामिल हुए. दूतावास नए राजदूत को दिए गए गर्मजोशी भरे भव्य स्वागत के लिए राजदूत इब्राहिम फखरो का धन्यवाद करता है. हम India और कतर के बीच घनिष्ठ और लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तत्पर हैं.”

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जुलाई में मध्य-पूर्वी देश का दौरा किया था और दोहा में कतर के Prime Minister शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी मुलाकात की थी.

बैठक के दौरान, विदेश मंत्री जयशंकर और Prime Minister ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के नए अवसरों की तलाश की.

विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज दोहा में कतर के पीएम और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मिलकर खुशी हुई. भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए उनका धन्यवाद किया. हमारे द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं, विशेष रूप से ऊर्जा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों की समीक्षा की. हमारी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के नए अवसरों की तलाश की. पश्चिम एशिया संघर्ष और उसके प्रभाव पर उनके आकलन साझा करने की सराहना की.”

केके/डीकेपी

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