भारत-उज्बेकिस्तान का जुड़ाव मध्य और दक्षिण एशिया के बीच पुल का काम कर सकता है: उज्बेक मीडिया

ताशकंद, 30 अगस्त . उज्बेकिस्तान मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, India और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग से दोनों देशों की साझेदारी मध्य और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले मुख्य पुलों में से एक बन सकती है.

उज्बेकिस्तान नेशनल न्यूज एजेंसी (यूजेडए) की रिपोर्ट में कहा गया, “इन बदलावों के मूल में दोनों देशों के नेताओं की दृढ़ Political इच्छाशक्ति, बुनियादी मतभेदों का अभाव, दोनों देशों की ऐतिहासिक निकटता और उनकी अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता है. दूसरे शब्दों में, संबंध संस्थागत मजबूती, विस्तारित आर्थिक सामग्री और संयुक्त मूल्य निर्माण की ओर क्रमिक बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुके हैं.”

Prime Minister Narendra Modi की यात्रा से पहले आई इस रिपोर्ट में कहा गया कि यह यात्रा “निस्संदेह द्विपक्षीय बातचीत को अतिरिक्त गति प्रदान करेगी, जिससे हुए समझौतों को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी के लिए नई प्राथमिकताओं को निर्धारित करने का अवसर मिलेगा.”

रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देशों के बीच Political संवाद ने व्यवस्थित और भरोसेमंद स्वरूप ले लिया है और 2017 के बाद से आमने-सामने और वर्चुअल दोनों प्रारूपों में कम से कम छह उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संपर्क हो चुके हैं.

इसमें कहा गया, “भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन, विदेश नीति विभागों के बीच परामर्श, अंतर-Governmentी आयोग और अंतर-संसदीय संपर्कों ने Political बातचीत को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान की है.”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि India और उज्बेकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका को मजबूत करने, आतंकवाद का मुकाबला करने, अफगानिस्तान को स्थिर करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने के दृष्टिकोण को साझा करते हैं.

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “दोनों देश रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाते हैं और गुटबाजी की सोच से मुक्त सहयोग की वकालत करते हैं. यह निकटता उनके संबंधों को बाहरी परिस्थितियों के प्रति लचीला बनाती है.”

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रही भू-Political उथल-पुथल के बावजूद India ने ‘नॉर्थ-साउथ’ व्यापार कॉरिडोर के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दिखाई है और इस कॉरिडोर की एक प्रमुख कड़ी चाबहार बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए निवेश जारी रखने की तत्परता व्यक्त की है.

इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे तेजी से बढ़ते भारतीय उद्योगों के कारण तांबा, यूरेनियम और दुर्लभ व महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए India आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने और बाहरी स्रोतों की सीमित संख्या पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया, “उज्बेकिस्तान के पास 32 प्रकार के खनिजों का भंडार है जो हरित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. आपसी हित केवल कच्चे माल की बिक्री में नहीं है, बल्कि संयुक्त वैल्यू चेन के निर्माण में है, जिसमें भूवैज्ञानिक अन्वेषण, हरित धातुओं का प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा के लिए घटकों का उत्पादन और उर्वरकों व रासायनिक उत्पादों का निर्माण शामिल है.”

रिपोर्ट में कहा गया, “India को अधिक स्थिर संसाधन आधार मिलेगा, जबकि उज्बेकिस्तान को पूंजी, प्रौद्योगिकी और स्थिर मांग मिलेगी. यह मॉडल न्यू उज्बेकिस्तान के मुख्य सिद्धांत के अनुरूप है.”

केके/डीकेपी

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