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Thursday, 22 October 2026
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भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए साझा हितों का विस्तार जरूरी: जयशंकर

भारत अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए साझा हितों का विस्तार जरूरी: जयशंकर

भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए साझा हितों का विस्तार जरूरी: जयशंकर

New Delhi, 20 अक्टूबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने Tuesday को कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में India और अमेरिका के संबंधों को और मजबूत करने के लिए साझा हितों का विस्तार करना जरूरी है. उन्होंने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता मजबूत करने में दोनों देशों का साझा हित है.

Mumbai में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उनकी पत्नी, अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि India और अमेरिका की साझेदारी पिछले कुछ दशकों में लगातार विस्तारित हुई है और इसमें नए आयाम जुड़े हैं.

विदेश मंत्री ने कहा कि Mumbai India की वित्तीय राजधानी होने के साथ-साथ शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, सिनेमा, खेल, संस्कृति, मीडिया और संगीत का भी प्रमुख केंद्र है. यह एक महानगरीय शहर है, जो दुनिया के लिए India का प्रवेश द्वार है और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर भी इसकी विशेष भूमिका है. ऐसे में अमेरिकी स्वतंत्रता की वर्षगांठ का Mumbai में मनाया जाना विशेष महत्व रखता है.

जयशंकर ने India और अमेरिका के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि Mumbai और अमेरिका के बीच संपर्क की शुरुआत कभी बर्फ के व्यापार से हुई थी, लेकिन आज यह संबंध वित्तीय, वाणिज्यिक और प्रौद्योगिकी सहयोग के केंद्र में है.

उन्होंने स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा, लियोन एबी के Mumbai में जैज संगीत लाने और जनरल इलेक्ट्रिक के रिएक्टरों के माध्यम से शहर की ऊर्जा जरूरतों में योगदान जैसे उदाहरणों का जिक्र किया. उन्होंने यह भी बताया कि स्टारबक्स ने India में अपना पहला आउटलेट Mumbai में खोला था. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी क्रिकेटर सौरभ नेत्रवलकर का भी उल्लेख किया, जिनका संबंध Mumbai से है.

विदेश मंत्री ने कहा कि India के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई अमेरिकियों ने India का समर्थन किया था. स्वतंत्रता के बाद बुनियादी ढांचे, शिक्षा, खाद्य, कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी ने India के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. वहीं, भारतीय प्रतिभा और कौशल ने अमेरिका में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है.

जयशंकर ने कहा कि India और अमेरिका के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं, खासकर दुनिया और उसकी चुनौतियों से निपटने के तरीकों को लेकर. इसके बावजूद दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. उन्होंने क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज पहल को इस बढ़ती साझेदारी के प्रमुख उदाहरणों में शामिल किया. उन्होंने ऊर्जा, रक्षा और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों में हुई प्रगति को भी उल्लेखनीय बताया.

Mumbai में हुए 26/11 आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि इस हमले ने शहर को निशाना बनाया था, लेकिन Mumbai के लोगों ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया. इस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों की भी जान गई थी. उन्होंने कहा कि India Mumbai के ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सराहना करता है. जयशंकर ने तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का भी स्वागत किया और कहा कि India आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार को लेकर स्पष्ट है. उन्होंने उम्मीद जताई कि India के साझेदार भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएंगे.

जयशंकर ने कहा कि दुनिया की व्यवस्था इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है और देश अपनी परिस्थितियों के अनुसार कदम उठा रहे हैं. ऐसे समय में India और अमेरिका के बीच साझा हितों की पहचान और विस्तार करना द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने का महत्वपूर्ण रास्ता है.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित संवाद और साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग से आगे बढ़ने का मार्ग तैयार होगा. उन्होंने रुबियो की India यात्रा और दिन में हुई चर्चाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के पास व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के नए अवसर हैं.

अंत में जयशंकर ने अमेरिका को उसकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं दीं और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की India की प्रतिबद्धता दोहराई.

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डीएससी

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