भारतीय नौसेना को मिला नया युद्धपोत, दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने में सक्षम

New Delhi, 6 नवंबर भारतीय नौसेना में युद्धपोत ‘अमिनी’ को शामिल किया गया है. यह स्वदेशी युद्धपोत पानी के भीतर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है. इसके साथ ही यह हल्के टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली से लैस है. इसके शामिल होने से समुद्री तटों की सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता मजबूत होगी.
नौसेना के मुताबिक गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा यह पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘अमिनी’ बनाया गई है. यह युद्धपोत समुद्र के उथले पानी में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें निशाना बनाने में सक्षम है.
अमिनी उन पनडुब्बी रोधी उथले जल वाले युद्धपोतों की श्रेणी में शामिल है, जिन्हें भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर देश में ही तैयार किया गया है. इन युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण जीआरएसई ने भारतीय जहाजरानी रजिस्टर के वर्गीकरण नियमों के अनुसार किया है. इस युद्धपोत की सबसे खास बात इसकी अत्याधुनिक हथियार और निगरानी प्रणालियां हैं. सोनार की मदद से पानी के भीतर मौजूद पनडुब्बियों और अन्य खतरों का पता लगाया जा सकता है. इसके बाद टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर के जरिए उन पर कार्रवाई की जा सकती है.
अमिनी भारतीय नौसेना के उन सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक है, जो पानी के जेट से संचालित होते हैं. यह तकनीक युद्धपोत को समुद्र में बेहतर गति और संचालन क्षमता प्रदान करती है. खास तौर पर तटीय क्षेत्रों और कम गहराई वाले समुद्री इलाकों में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी. इस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से पनडुब्बी रोधी अभियानों के साथ-साथ तटीय निगरानी और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता भी मजबूत होगी. इससे नौसेना को समुद्र के संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
युद्धपोत का नाम लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया है. यह नाम भारतीय नौसेना की पुरानी परंपरा को भी आगे बढ़ाता है. इससे पहले भी नौसेना में ‘आईएनएस अमिनी’ नाम का युद्धपोत सेवा दे चुका है. वह पेट्या-3 श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत था, जिसे वर्ष 2002 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था. अब नए युद्धपोत को यही नाम देकर उस पुराने युद्धपोत की विरासत को आगे बढ़ाया गया है.
अमिनी का निर्माण आत्मनिर्भर India की दिशा में देश की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता का भी प्रमाण है. इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. यानी इसके निर्माण में देश में विकसित और तैयार किए गए उपकरणों तथा प्रणालियों की बड़ी हिस्सेदारी है.
नौसेना का कहना है कि इससे रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ने के साथ विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी. स्वदेशी युद्धपोत अमिनी की नौसेना को सुपुर्दगी India में आधुनिक युद्धपोतों के डिजाइन और निर्माण की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है. यह समुद्र के भीतर मौजूद खतरों से निपटने और देश के तटीय समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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जीसीबी/एसके


