भाजपा नेताओं का डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी पर पलटवार, ‘देश को बांटने की नहीं, विकास पर हो बात’

जम्मू, 27 अगस्‍त . भाजपा नेताओं सुनील शर्मा और सतपाल शर्मा ने डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी पर पलटवार करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए अब पुरानी बात हो चुकी है और नेशनल कॉन्फ्रेंस को पुराने मुद्दों को फिर से उठाने से बचना चाहिए.

दरअसल, डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को वापस लेकर रहेंगे.

विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा, “मुझे लगता है कि आज डिप्टी सीएम का आर्टिकल 370 को बहाल करने वाला बयान, उनके आका और पार्टी प्रमुख के प्रति उनकी वफादारी दिखाने की एक कोशिश है. ऐसी खबरें हैं कि Government भ्रष्टाचार और कामकाज के आधार पर कई मंत्रियों में फेरबदल कर रही है, इसलिए शायद यह बयान उनकी वफादारी दिखाने के लिए दिया गया है.”

उन्‍होंने कहा कि डिप्टी सीएम का बयान गंभीर बात है. अनुच्छेद 370 को आतंकवाद और अलगाववाद का बीज माना जाता है. आतंकवाद को खत्‍म करने के लिए वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी है. डिप्‍टी सीएम के बयान ने वीरों के बलिदान को शर्मसार किया है. जिस निर्वाचन क्षेत्र से वह जीते हैं, वहां के लोग इस मिट्टी और अलगाववाद-आतंकवाद के विरुद्ध अपना खून बहाने वाले हैं.

सुनील शर्मा ने कहा कि मैं कहता हूं कि आज वह समाज 370 के खात्‍मे के बाद शांतिपूर्ण वातावरण में रह रहा है. लेकिन कुर्सी और स्‍वार्थ के लिए सारी हदें पार करके इस तरह के बयान से नौजवानों और सैनिकों को शर्मसार कर रहे हैं. डिप्‍टी सीएम की पार्टी की तीन पीढ़ियों ने जम्‍मू-कश्‍मीर को रक्‍तरंजित किया है. क्‍या वह और अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देना चाहते है?

भाजपा नेता सतपाल शर्मा ने से बातचीत के दौरान कहा कि देश को बड़े हिस्‍सों में करना, यह शायद उस वक्‍त के शासकों में था जो हम पर आक्रमण करते थे, अंग्रेजों में था जो डिवाइड एंड रूल की नीति पर काम करते थे. हम जब एक India श्रेष्‍ठ India की बात करते हैं, तो हमारी संस्‍कृति की पहचान हर जगह दिखनी चाहिए.

उन्‍होंने डिप्‍टी सीएम को सलाह देते हुए कहा कि उन्‍हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम करने की जरूरत है. इस प्रदेश में विकास को प्राथमिकता देना हमारी मानसिकता होनी चाहिए, न कि देश को बांटने वाली सोच. इतिहास के पन्‍नों में गुम हुई चीजें वापस नहीं आती. अनुच्छेद 370 और 35ए अब पुरानी बातें हो चुकी हैं.

एएसएच/एबीएम

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