भाजपा के ‘सत्ता परिवर्तन’ आरोपों पर थरूर का पलटवार, ‘आपातकाल के अंत’ का दिया उदाहरण

New Delhi, 23 अक्टूबर . कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने Friday को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इस दावे पर पलटवार किया कि एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों के पीछे ‘असली मकसद’ सत्ता परिवर्तन कराना है. उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन Prime Minister इंदिरा गांधी के कार्यकाल में ‘विपक्ष एकजुट हो गया था’ और उसने आपातकाल लागू करने वाली Government को ‘पराजित’ किया था.
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के एक संवाद सत्र में थरूर ने कहा: “(Prime Minister नरेंद्र) मोदी आपातकाल और उसके खात्मा की बात करते रहते हैं. यह खात्मा कैसे हुआ? विपक्ष के जरिए, जिसमें आरएसएस और भाजपा समाजवादियों और वामपंथियों के साथ एकजुट हो गए थे. वे सभी आपातकाल घोषित करने वाली Government को हराने के लिए एकजुट हुए थे. यह हाल का भारतीय Political इतिहास है, मात्र पचास वर्ष पहले की बात है.
वह इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस Government को एकजुट जनता पार्टी द्वारा मिली हार का जिक्र कर रहे थे.
पूर्व Union Minister ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि फ्रांस में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों की तरह India में भी ऐसे प्रदर्शन हो सकते हैं. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे संविधान और कानूनों में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक भारतीय नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है; हिंसा नहीं.”
उन्होंने जोर देकर कहा, “फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, उसे India की राजनीति में कोई भी बर्दाश्त नहीं करेगा. मैं भी नहीं करता, और मुझे नहीं लगता कि मेरी पार्टी किसी भी तरह से (हिंसा का) स्वागत करेगी.”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में विश्वास रखती है. थरूर ने कहा कि अगर Government और चुनाव आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन में कथित अनियमितताओं के लिए ‘जवाबदेह’ होने को तैयार हों, तो व्यवस्था को ‘साफ’ किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, “हम (कांग्रेस) शांतिपूर्ण, संगठित और अनुशासित विरोध में विश्वास रखते हैं. साथ ही, हमें उम्मीद है कि अगर Government और चुनाव आयोग पिछले कुछ वर्षों में एसआईआर प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं के लिए जवाबदेह होने को तैयार हों, तो हमें विश्वास है कि एक बार फिर व्यवस्था साफ हो जाएगी.”
उन्होंने कहा, “चुनावी नियमों को बहाल किया जाएगा, किसी भी भारतीय नागरिक को अपना वोट डालने और अपने Political विकल्पों को चुनने के संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, और एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में ‘सत्ता परिवर्तन’ नहीं होगा; Government परिवर्तन होगा. भारतीय जनता ने वर्तमान Government की कमियों को देखा है, लेकिन हम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से वह (परिवर्तन) लाना चाहते हैं.”
इससे पहले, एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के जेन-जी आंदोलन की प्रशंसा की थी, जिसे उन्होंने India के युवाओं के लिए ‘प्रेरणा’ बताया था. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ‘सत्ता परिवर्तन की लड़ाई’ में तब्दील हो गया है.
थरूर के गृह राज्य केरल और अन्य जगहों पर आपस में लड़ रहे वामपंथियों के साथ कांग्रेस के गठबंधन के सवाल पर, थरूर ने नेहा बोरा का जिक्र किया.
कांग्रेस नेता ने कहा कि इन पार्टियों का अपना महत्व है, लेकिन नेहा बोरा हमारे खिलाफ प्रचार नहीं कर रही थीं. मैं उन्हें पसंद करता हूं; उन्होंने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन में बहुत ऊर्जा, रंग और जोश भर दिया है. यह कांग्रेस पार्टी के एक उदारवादी पार्टी होने और स्वीकार्यता के बारे में है. यह विपक्षी एकता है.
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