
नई दिल्ली, 15 सितंबर . India की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का नतीजा बेहद सफल रहा. हमने एक बहुत गंभीर, ठोस और आम सहमति वाला ‘फाइनल डिक्लेरेशन’ हासिल किया है. यह बात उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने के साथ हुई विशेष बातचीत में कही.
विदेश मंत्री लुबेटकिन ने अपनी India की यात्रा को लेकर को बताया कि मैं अपनी इस यात्रा में कई लक्ष्य हासिल करना चाहता था. सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण, मैं India Government के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना चाहता था. दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन था और तीसरा, मैं India और मर्कोसुर के बीच संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता था.
के साथ हुई विशेष बातचीत में उन्होंने और भी कई अहम सवालों पर अपने अनुभव साझा किए. आईए जानते हैं इस दौरान उन्होंने और कौन-कौन से मुद्दों पर चर्चा की.
विदेश मंत्री लुबेटकिन पूछा गया कि आप ब्रिक्स में India की नेतृत्व भूमिका को कैसे देखते हैं?
उन्होंने कहा, मेरे विचार से इस शिखर सम्मेलन का नतीजा बेहद सफल रहा. सम्मेलन की तैयारी के दौरान कई सवाल थे और बहुत कम लोगों को पता था कि आखिरकार क्या परिणाम निकलेंगे. लेकिन अंत में हम एक ऐसे संयुक्त घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) तक पहुंचे जो गंभीर, व्यावहारिक और सभी की सहमति पर आधारित था. इसमें कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनी.
उन्होंने कहा कि दुनिया में चल रहे कुछ युद्धों और संघर्षों में अलग-अलग पक्ष शामिल हैं, लेकिन मुझे लगता है कि बैठक के अध्यक्ष के रूप में India के President और India Government ने सभी पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
यह दिखाता है कि आज के समय में खासकर ग्लोबल साउथ में India प्रमुख नेताओं में से एक है.
उन्होंने कहा कि सिर्फ बातें करने के बजाय हमें नतीजों को देखना चाहिए और समझना चाहिए कि India ने इस सम्मेलन में क्या हासिल किया.
सवाल: India और उरुग्वे के संबंधों का भविष्य आप कैसे देखते हैं?
जवाब: मैं पूरी तरह उम्मीद से भरा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे दोनों देश कई मायनों में एक-दूसरे के पूरक हैं. कई मुद्दों पर हमारी लोकतांत्रिक सोच भी मिलती-जुलती है और ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां हम साथ मिलकर काम कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमारे रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए तीन अलग-अलग रास्ते हैं, जो एक साथ चल सकते हैं.
पहला रास्ता द्विपक्षीय संबंधों का है. इसमें अर्थव्यवस्था, संस्कृति, फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग (जिसमें Bollywood भी शामिल है), खेल और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है.
दूसरा रास्ता India और मर्कोसुर के बीच संबंधों का है. आज मैंने व्यापार मंत्री के साथ मिलकर India और मर्कोसुर के बीच बातचीत के अगले चरण को शुरू करने पर सहमति बनाई है. यह सिर्फ उरुग्वे के लिए ही नहीं, बल्कि अर्जेंटीना, ब्राजील और पराग्वे जैसे अन्य मर्कोसुर देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रक्रिया है.
तीसरा रास्ता क्षेत्रीय सहयोग का है. फिलहाल उरुग्वे मर्कोसुर की अध्यक्षता कर रहा है और साथ ही ‘सेलाक’ की भी अध्यक्षता कर रहा है. ‘सेलाक’ एक ऐसा समूह है जिसमें लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के 33 देश शामिल हैं.
इससे India और ‘सेलाक’ के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक और महत्वपूर्ण अवसर मिलता है.
इसी संदर्भ में कुछ दिनों बाद न्यूयॉर्क में India के विदेश मंत्री और ‘सेलाक’ के तहत लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियाई देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. उस बैठक का उद्देश्य यह चर्चा करना होगा कि India और पूरे क्षेत्र के बीच संबंधों को और कैसे मजबूत किया जाए.
सवाल: आप Prime Minister Narendra Modi को एक वैश्विक नेता के रूप में कैसे देखते हैं?
जवाब: जैसा कि मैंने पहले कहा, इस शिखर सम्मेलन की सफलता India की सफलता थी और यह Prime Minister मोदी की भी सफलता थी.
Saturday और Sunday के दौरान आपने देखा होगा कि Prime Minister मोदी दुनिया के कई महत्वपूर्ण नेताओं के साथ किस तरह बातचीत कर रहे थे. और सभी उनकी बात ध्यान से सुन रहे थे और उन्हें एक अहम और भरोसेमंद नेता के रूप में देख रहे थे.
मैं उन द्विपक्षीय बैठकों का हिस्सा नहीं था, लेकिन अंदरूनी बैठकों में यह माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था. बैठक के अंत में Prime Minister मोदी ने घोषणा की कि ‘सभी मुद्दों पर सहमति’ बन गई है.
उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से यह बात बताती है कि इस समय वैश्विक स्तर पर Prime Minister मोदी की क्या भूमिका और महत्व है.
सवाल: एशिया और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ उरुग्वे के संबंधों के लिए India कितना महत्वपूर्ण है?
जवाब: मैंने अपने कुछ यूरोपीय सहयोगियों से भी कहा है कि उरुग्वे के लिए यह India का समय है.
जब मैं कहता हूं कि यह India का समय है, तो मेरा मतलब है कि आज India पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत है. 20 या 10 साल पहले भी शायद हमने इसकी कल्पना नहीं की थी. इस वजह से आज एक बिल्कुल नई स्थिति पैदा हुई है.
मुझे पूरा विश्वास है कि अगर हम आर्थिक, सांस्कृतिक, खेल, सामाजिक और कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ठोस समझौते कर पाते हैं, तो उनका फायदा India और उरुग्वे दोनों को होगा.
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता. यह वह समय है जब हमें ठोस समझौते करने चाहिए और ऐसे दौर में आगे बढ़ना चाहिए जहां दुनिया विभाजन, मतभेदों और संघर्षों का सामना कर रही है.
ऐसे देशों के बीच सहमति बनाने का समय है जिनकी सोच और दृष्टिकोण काफी हद तक मिलते-जुलते हैं. साथ ही हमें व्यावहारिक नतीजों पर ध्यान देना चाहिए.
मेरा मानना है कि यही हमारे भविष्य के सहयोग का आधार होगा.
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि India ने पहली बार अपने इतिहास में उरुग्वे में दूतावास खोला है.
दोनों देशों के युवा राजनयिकों की पीढ़ी के सदस्य के रूप में मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले महीनों में India का विदेश मंत्रालय उरुग्वे आएगा, दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा और हमारे साथ मिलकर यह तय करेगा कि हम अपने समझौतों को जमीन पर कैसे उतार सकते हैं.
सवाल: क्या आपकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात हुई? वह बैठक कैसी रही?
जवाब: जी हां, विदेश मंत्री के साथ मेरी मुलाकात बहुत महत्वपूर्ण रही. हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, उनमें से एक यह है कि अब India और उरुग्वे के रिश्तों को और गहरा और व्यापक बनाने का समय आ गया है. मेरा मानना है कि India और उरुग्वे के विदेश मंत्रालय इस सोच पर पूरी तरह एकमत हैं.
असल में, यह बात 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में Prime Minister मोदी और उरुग्वे के President यामांडू ओर्सी की मुलाकात से जुड़ी हुई है. कई वर्षों बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी.
उस बैठक में दोनों नेताओं ने India और उरुग्वे के संबंधों को लंबे समय तक मजबूत बनाने की दिशा में चर्चा की थी.
Prime Minister मोदी ने मुझे काफी प्रभावित किया. वह उस बैठक में अपने साथ एक कागज लेकर आए थे, जिस पर उन्होंने अगले 10 से 15 वर्षों में भारत-उरुग्वे संबंधों को लेकर अपना विजन लिखा हुआ था. यह एक दीर्घकालिक सोच और योजना थी.
अब हमारे दोनों विदेश मंत्रालयों के सामने यह जिम्मेदारी है कि पिछले साल Prime Minister और President के बीच जो समझ और सहमतियां बनी थीं, उन्हें जमीन पर उतारा जाए.
हमारी लगभग आधे घंटे की बैठक के दौरान हमने एक बहुत दिलचस्प अभ्यास किया और अगले एक साल के लिए भारत-उरुग्वे संबंधों का एक रोडमैप तैयार किया.
हम कोशिश कर रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच हुई व्यापक और रणनीतिक चर्चाओं को वास्तविक कार्यों में बदला जाए.
आने वाले एक साल में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें हम मिलकर काम कर सकते हैं, जैसे आर्थिक सहयोग, Political सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कई अन्य क्षेत्र.
मुझे उम्मीद है कि अक्टूबर 2027 तक हम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लेंगे. फिलहाल उरुग्वे के President यामांडू ओर्सी की India यात्रा पर विचार किया जा रहा है.
उस दौरान उनकी फिर से Prime Minister मोदी से मुलाकात हो सकती है. दोनों नेता यह समीक्षा कर सकते हैं कि 2025 के बाद से क्या प्रगति हुई है और भारत-उरुग्वे संबंधों को मजबूत करने के लिए हम क्या-क्या हासिल कर पाए हैं.
इसके बाद हम आगे के दीर्घकालिक कदमों पर भी चर्चा कर सकेंगे.
मेरा मानना है कि यह एक बेहद गंभीर और सोच-समझकर चलाया जा रहा प्रयास है. हमें साफ पता है कि हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है, और India तथा उरुग्वे की Governmentों के बीच इस बात पर काफी अच्छी समझ और सहमति है कि दोनों देशों के रिश्तों को किस तरह आगे ले जाना चाहिए.
सवाल: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान विवाद पर आपका क्या कहना है?
जवाब: उरुग्वे एक शांतिप्रिय देश है और हम इन संघर्षों में शामिल नहीं हैं. लेकिन यह सच है कि दुनिया भर में संघर्ष और टकराव तेजी से बढ़ रहे हैं.
हम यूक्रेन-रूस युद्ध की बात कर सकते हैं या मध्य पूर्व की स्थिति की, लेकिन इसके अलावा भी दुनिया में कई ऐसे संघर्ष चल रहे हैं जिनमें हजारों लोग, खासकर महिलाएं और बच्चे, अपनी जान गंवा रहे हैं. यह आज की दुनिया के लिए बहुत दुखद और चिंताजनक स्थिति है.
उन्होंने कहा कि मेरा पूरा विश्वास है कि इन संघर्षों का समाधान सिर्फ सैन्य कार्रवाई या युद्ध के जरिए नहीं निकाला जा सकता. जब तक हम गंभीर Political बातचीत और ठोस वार्ता की दिशा में प्रयास नहीं करेंगे, तब तक इन समस्याओं का समाधान मुश्किल है.
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एवाई/पीएम