
एथेंस, 19 सितंबर . ब्रिक्स में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की संयुक्त बयान में चर्चा ने New Delhi की स्थिति को मजबूत किया है. आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाकर ब्रिक्स ने उस दलील को मजबूती दी है जिसे India दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है. एथेंस स्थित ‘डायरेक्टस’ की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है.
India की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए New Delhi घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ व्यक्त रुख को India के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, घोषणापत्र में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आतंकवाद को Political व्याख्या के जरिए वैध नहीं ठहराया जा सकता और रणनीतिक सुविधा के आधार पर आतंकवादियों के बीच भेद नहीं किया जाना चाहिए.
रिपोर्ट में कहा गया, “गोषणापत्र में Pakistan का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया है. हालांकि, इस तथ्य को न तो छिपाया जाना चाहिए और न ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए. इसके बावजूद, विभिन्न और कई बार एक-दूसरे से अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों के समूह द्वारा ऐसी शब्दावली स्वीकार किया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण है. India के लिए इसका खास कूटनीतिक महत्व है.”
‘डायरेक्टस’ ने कहा कि इस घटनाक्रम से Pakistan के सामने एक असहज सवाल खड़ा होता है कि सीमा पार आतंकवाद से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चर्चा आखिर कब तक उन बुनियादी ढांचों, संगठनों और वैचारिक नेटवर्क से अलग रखी जा सकती है, जिनके Pakistan की जमीन से संचालित होने का आरोप India लगातार लगाता रहा है.
रिपोर्ट में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकवादी हमले का भी उल्लेख किया गया. ऐसा बर्बर हमला जिसमें 26 निर्दोष मारे गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, India ने इस हमले को केवल एक और आतंकवादी घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दा बनाया.
इसमें लिखा गया, “ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम हमले की कड़े शब्दों में निंदा से इस त्रासदी को महत्वपूर्ण बहुपक्षीय आयाम मिला है. इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हमले की निंदा के साथ ही घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंक के वित्तपोषण और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है.”
‘डायरेक्टस’ के मुताबिक, यह संयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि India लगातार यह रुख रखता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को केवल Political विवाद के नजरिए से नहीं देखा जा सकता.
रिपोर्ट में कहा गया, “आतंकवादियों को हथियार, प्रशिक्षण, वित्तीय मदद, संचार व्यवस्था, भर्ती नेटवर्क और संचालन के लिए ठिकानों की जरूरत होती है. ऐसी दशा में आतंकवाद से मुकाबले का अर्थ केवल उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है जो गोली चलाता है, बल्कि उस पूरे तंत्र के खिलाफ कार्रवाई करना है जो उसे सक्षम बनाता है.” रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स के भीतर इस सिद्धांत को महत्वपूर्ण समर्थन मिलना India के लिए अहम है.
रिपोर्ट ने Prime Minister Narendra Modi की बहुआयामी विदेश नीति को भी इस घटनाक्रम से जोड़ते हुए कहा कि India एक साथ ऐसे देशों के साथ संबंध बनाए रखने में सक्षम रहा है, जिनके बीच कई महत्वपूर्ण भू-Political मतभेद हैं.
इसमें कहा गया, “India क्वाड में भागीदार होने के साथ ब्रिक्स के प्रमुख सदस्यों में भी शामिल है. वह रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ भी लगातार महत्वपूर्ण साझेदारी विकसित कर रहा है. India ने खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों का भी तेजी से विस्तार किया है और साथ ही इजरायल के साथ करीबी संबंध बनाए रखे हैं.”
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के साथ India के बड़े मतभेदों के बावजूद दोनों देश उन मुद्दों पर संवाद जारी रखते हैं जहां राष्ट्रीय हित इसकी मांग करते हैं.
‘डायरेक्टस’ ने कहा कि India की रणनीतिक स्वायत्तता को कई बार संतुलित करना कठिन बताया गया है, लेकिन ब्रिक्स के घटनाक्रम ने इसकी उपयोगिता को भी रेखांकित किया है.
इसमें India के निष्पक्ष अंदाज की प्रशंसा करते हुए आगे लिखा गया, “India ने अलग-अलग भू-Political हित रखने वाले देशों के समूह के सामने अपनी प्रमुख सुरक्षा चिंताओं को रखा और एक सार्थक आम सहमति हासिल की. इससे India की एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में स्थिति मजबूत होती है और यह धारणा कमजोर होती है कि वह किसी एक भू-Political गुट का हिस्सा मात्र है.”
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केआर/