
नई दिल्ली, 31 अगस्त . Union Minister अमित शाह की उपस्थिति में Monday को New Delhi में बिहार और Jharkhand के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.
इस अवसर पर Jharkhand के Chief Minister हेमंत सोरेन, बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के उपChief Minister , केंद्रीय गृह सचिव और India Government और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिहार और Jharkhand के बीच आज के समझौते से पूर्वी India के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है. उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और Jharkhand के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा.
अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता Prime Minister मोदी द्वारा की गई टीम India की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है. उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर India के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके. शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी.
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और Jharkhand के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है. दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है.
शाह ने कहा कि इस समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और Patna की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा. इसके साथ ही, Jharkhand के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा.
Jharkhand के Chief Minister हेमंत सोरेन और बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान के लिए Prime Minister मोदी और Union Minister अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया.
गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं.
7 जुलाई को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों Maharashtra, Gujarat, Rajasthan और Madhya Pradesh के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ. यह समझौता Madhya Pradesh, Gujarat, Rajasthan और Maharashtra राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है.
29 जून को अमित शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में Rajasthan और Haryana Government के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे. इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए Rajasthan तक पहुंचेगा. इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिए Rajasthan के हिस्से का यमुना का पानी पहुंचाना है. इससे Rajasthan , अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा. इस परियोजना से Rajasthan के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फायदा होगा.
16 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में New Delhi में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी. बैठक में Himachal Pradesh, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, Haryana और Rajasthan ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना’ के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमत हुए.
किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र Government द्वारा और शेष 10 प्रतिशत राशि का वित्तीय भार 6 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा. Himachal Pradesh के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में Himachal Pradesh के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और Rajasthan को देने पर सहमति बनी.
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एएसएच/डीकेपी