उपराष्ट्रपति ने लक्षद्वीप में ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ किया लॉन्च, मत्स्य पालन को मिलेगा नया आयाम

New Delhi, 31 अगस्त . उपPresident सीपी. राधाकृष्णन ने Monday को लक्षद्वीप के अगात्ती में मत्स्य पालन आउटरीच कार्यक्रम में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने सजावटी मछली पालन के विकास के लिए रणनीतिक कार्य योजना ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ जारी की और मत्स्य पालन क्षेत्र के लाभार्थियों को विभिन्न Governmentी लाभ और सहायता वितरित की.

सभा को संबोधित करते हुए उपPresident ने इस मौके को लक्षद्वीप के लिए एक ऐतिहासिक दिन और India की ‘नीली क्रांति’ में एक नया मील का पत्थर बताया. उन्होंने Prime Minister Narendra Modi के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि India के राष्ट्रीय ध्वज में बना नीला चक्र ‘नीली क्रांति’ और समुद्री अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को दर्शाता है. Prime Minister के नेतृत्व में India का मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख उभरते हुए क्षेत्र के रूप में सामने आया है.

सीपी. राधाकृष्णन ने कहा कि Government लोगों के उसके पास आने का इंतजार करने के बजाय, सीधे मछली पकड़ने वाले समुदायों तक मदद और योजनाएं पहुंचाकर शासन व्यवस्था में बदलाव ला रही है. उन्होंने बताया कि ‘Prime Minister मत्स्य संपदा योजना’ के तहत लक्षद्वीप के लिए 62 करोड़ रुपए से ज्यादा की मत्स्य पालन विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.

लक्षद्वीप की विशाल समुद्री क्षमता पर जोर देते हुए उपPresident ने कहा कि इन द्वीपों में मछली पकड़ने की अनुमानित क्षमता एक लाख टन से ज्यादा है, जिसमें लगभग 94,000 टन टूना और टूना जैसी मछलियां शामिल हैं. उन्होंने द्वीप समुदायों के लिए ज्यादा समृद्धि सुनिश्चित करते हुए वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से इस क्षमता का इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया.

उपPresident ने India के बढ़ते समुद्री खाद्य निर्यात का भी जिक्र किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष में 73,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया और 120 से ज्यादा देशों तक पहुंचा. उन्होंने कहा कि ईईजेड और हाई सीज से जुड़ी पहल India के मत्स्य पालन क्षेत्र और वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में India की मौजूदगी को और मजबूत करेंगी.

टिकाऊपन पर जोर देते हुए राधाकृष्णन ने जिम्मेदारी से मछली पकड़ने, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और अवैध, बिना रिपोर्ट किए गए और बिना नियम-कानून के मछली पकड़ने के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे मत्स्य पालन को केवल विरासत में मिले पेशे के तौर पर न देखें, बल्कि विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन और वैश्विक अवसरों से चलने वाले एक आधुनिक पेशे के तौर पर देखें.

हरित और श्वेत क्रांति से तुलना करते हुए उपPresident ने कहा कि ‘नीली क्रांति’ में भी मछली पकड़ने वाले समुदायों के जीवन को बदलने की क्षमता है. उन्होंने सभी संबंधित लोगों से आग्रह किया कि वे मिलकर काम करें ताकि India की ‘ब्लू इकॉनमी’ विकसित India 2047 का एक मजबूत स्तंभ बन सके.

एससीएच/एबीएम

Leave a Comment