
वाराणसी, 7 अक्टूबर . Prime Minister मोदी और जापान के पूर्व Prime Minister दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती का जिक्र करते हुए Chief Minister योगी ने कहा कि यह रिश्ता पद से नहीं, विश्वास से बना था. पद बदलते रहे, लेकिन मित्रता नहीं बदली. 7 अक्टूबर 2001 को Prime Minister मोदी ने पहली बार Gujarat के Chief Minister के रूप में शपथ ली थी. जनसेवा की इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन उनके मित्र आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन इससे सुंदर संयोग नहीं हो सकता.
Chief Minister योगी ने Wednesday को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया. उन्होंने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया. Chief Minister योगी ने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, Prime Minister मोदी और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से आबे को विनम्र श्रद्धांजलि बताया. उन्होंने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व Prime Minister की स्मृति को हमेशा के लिए बसा रही है.
सीएम योगी ने कहा कि 2007 में Gujarat के Chief Minister के रूप में Prime Minister मोदी जापान गए थे. वहीं उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई. उसी वर्ष आबे ने India की संसद में कहा था कि मजबूत India जापान के सर्वोत्तम हित में है और मजबूत जापान India के सर्वोत्तम हित में. वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में आबे ने Prime Minister मोदी के साथ काशी में गंगा आरती देखी. वर्ष 2017 में दोनों नेताओं ने Ahmedabad में बुलेट ट्रेन का शिलान्यास किया. 2018 में आबे ने Prime Minister मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया.
Chief Minister योगी ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों का विश्वास बन जाती है तो इतिहास बदलता है. 2021 में शिंजो आबे को India के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. सितंबर 2022 में Prime Minister मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे. पूरे India ने राष्ट्रीय शोक रखा. उन्होंने कहा, ”यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था.”
गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए Chief Minister योगी ने कहा कि आज की दुनिया में बिना लाभ-हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना कठिन है. दुनिया इंटरेस्ट देखकर रिश्ते बनाती है, जबकि India और जापान के रिश्ते ट्रस्ट यानी विश्वास पर आधारित हैं. करीब 1400 जापानी कंपनियां India में काम कर रही हैं. दोनों देशों की साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच चुकी है. जापान के पास टेक्नोलॉजी और अनुभव है तो India के पास टैलेंट और युवा ऊर्जा है.
इसी वर्ष फरवरी की जापान यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ के निवेश पर समझौते हुए. उन्होंने 500 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज चलने वाली मैग्लेव ट्रेन में जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखा. यामानाशी अब उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर है. Chief Minister योगी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है. इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है. जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास स्केल, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे व एयरपोर्ट का सबसे बड़ा नेटवर्क है.
Chief Minister योगी ने कहा कि 2027 में भारत-जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और यह गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट है. जापान ‘लैंड ऑफ द राइजिंग सन’ है और उत्तर प्रदेश ‘लैंड ऑफ द सन डायनेस्टी’. सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े तीर्थ हैं. इसलिए जापान की आस्था का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. काशी और क्योटो अपनी-अपनी सभ्यता की आत्मा हैं. दोनों ने विरासत को संभालकर विकास करना सिखाया है.
Chief Minister योगी ने आबे मेमोरियल कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया. उन्होंने कहा कि यहां आने वाला हर युवा सीखेगा कि दूर की सोच रखने वाला एक नेता दो देशों का भविष्य कैसे बदल देता है. जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे पति शिंजो आबे को याद करते हुए भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि उनके पति का Prime Minister मोदी से गहरा लगाव और आत्मीय संबंध था. वर्ष 2015 में काशी आने के बाद वह उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे. तभी से उनके मन में भी वाराणसी आने की इच्छा थी.
उन्होंने कहा कि आज उनके पति जीवित होते तो अपने नाम पर बने इस स्मारक को देखकर बहुत खुश होते. यह कहते हुए उनकी आंखों में आंसू छलक आए. अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के डिजाइन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसकी बाहरी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगे हैं. जापान में भी 108 की संख्या का विशेष महत्व है और नया कार्य शुरू होने पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं.
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विकेटी/एसके