पोस्ट-ऑपरेटिव सहायता नहीं मिलने पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति की याचिका, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

कोच्चि, 17 सितंबर . केरल हाई कोर्ट ने Thursday को एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की याचिका पर राज्य Government से जवाब मांगा है. याचिका में ऑपरेशन के बाद मिलने वाली वित्तीय सहायता की पूरी राशि नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है.

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने Governmentी पक्ष को निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर के लिए निर्धारित की.

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आता है और वर्तमान में बेरोजगार है.

उसने लिंग परिवर्तन सर्जरी कराई थी, जिसके लिए उसे पहले 62,563 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी.

सर्जरी के बाद उसने ऑपरेशन के बाद की देखभाल और उपचार के लिए वित्तीय सहायता की मांग करते हुए आवेदन किया. इसके लिए उसने 14 नवंबर 2018 को जारी राज्य Government के आदेश का हवाला दिया.

Governmentी आदेश के अनुसार, लिंग परिवर्तन सर्जरी करा चुके ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 12 महीने तक हर महीने 3,000 रुपए की सहायता दी जाती है.

इस योजना के तहत कुल 36,000 रुपए की सहायता मिलनी है. याचिकाकर्ता का कहना है कि उसे केवल पांच महीने के लिए 15,000 रुपए मिले, जबकि बाकी सात महीनों की 21,000 रुपए की राशि अब तक नहीं दी गई.

उसने कहा कि बकाया राशि के लिए उसने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उसे भुगतान नहीं मिला.

इसके बाद उसने केरल हाईकोर्ट का रुख करते हुए अधिकारियों को शेष 21,000 रुपए जारी करने का निर्देश देने की मांग की है.

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि सहायता राशि नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मिले उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

अपने पक्ष के समर्थन में उसने जेन कौशिक बनाम India संघ मामले में Supreme Court के फैसले का भी हवाला दिया है.

याचिका में अदालत से अधिकारियों को शेष 21,000 रुपए जारी करने का आदेश देने की मांग की गई है.

अंतरिम राहत के तौर पर उसने सामाजिक न्याय निदेशक के समक्ष दी गई अपनी अर्जी पर विचार करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के अन्य लोगों से उसे जानकारी मिली है कि उनके कल्याण के लिए जारी की गई कुछ धनराशि का पूरा उपयोग नहीं हो पाता और बाद में वह वापस चली जाती है. इसके कारण कई लाभार्थी निर्धारित सहायता से वंचित रह जाते हैं.

फिलहाल, हाई कोर्ट ने मामले में राज्य Government से जवाब मांगा है और अब इस पर अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी.

एएमटी/डीकेपी

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