
Mumbai , 8 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने Thursday को पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) द्वारा कृषि भूमि के विकास के लिए चलाई जा रही 48,000 करोड़ रुपए की सामूहिक निवेश योजना के सिलसिले में Mumbai , पुणे और रायगढ़ (Maharashtra) में 567.45 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां जब्त की हैं.
एक अधिकारी ने बताया कि पीएसीएल की संपत्तियों को ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत जब्त किया.
ईडी ने प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार और बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज और ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम पर मौजूद 48 अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत 567.45 करोड़ रुपए है.
इस जब्ती के साथ ईडी ने अब तक लगभग 30,235.21 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां जब्त की हैं, जिनमें India और विदेश में मौजूद संपत्तियां शामिल हैं.
ईडी की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा New Delhi में इंडियन पीनल कोड (आईपीसी), 1860 की धारा 120-बी और 420 के तहत दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू की गई थी. ये धाराएं साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित हैं.
इसके बाद, सीबीआई ने एक अवैध निवेश योजना चलाने में भूमिका के लिए 33 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की.
चार्जशीट के अनुसार, आरोपी कंपनियों और व्यक्तियों ने एक बड़ी अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाई. उन्होंने पूरे India में लाखों निवेशकों से कृषि भूमि की बिक्री और विकास के बहाने धोखाधड़ी से 48,000 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए.
निवेशकों को कैश डाउन पेमेंट और किश्तों में भुगतान की योजनाओं के जरिए निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और उनसे एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों जैसे गुमराह करने वाले कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए.
ईडी ने कहा, “ज्यादातर मामलों में जमीन कभी नहीं दी गई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों का लगभग 48,000 करोड़ रुपए का बकाया रह गया.”
ईडी ने 2016 में इस मामले में ‘एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट’ (ईसीआईआर) दर्ज की और 2018 में चार्जशीट दायर की. इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में विभिन्न आरोपियों के खिलाफ छह सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गईं.
ईडी ने आगे कहा कि प्रतीक कुमार को 20 अगस्त 2022 को दायर पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी (ए-13) बनाया गया था और स्पेशल कोर्ट ने 19 सितंबर 2022 के आदेश के जरिए इसका संज्ञान लिया था.
इसके बाद, स्पेशल कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को प्रतीक कुमार के खिलाफ एक ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया. इन संस्थाओं का मालिकाना हक और नियंत्रण प्रतीक कुमार के पास है.
जांच से पता चला कि ये अचल संपत्तियां पीएसीएल से डायवर्ट किए गए फंड का इस्तेमाल करके खरीदी गई थीं. पीएसीएल ने मूल रूप से भोले-भाले निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया था, इसलिए ये संपत्तियां अपराध से हुई कमाई मानी जाएंगी.
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डीके/डीकेपी