पीएम मोदी ने सिर्फ नींबू पानी पीकर 23 दिनों में इमरजेंसी पर लिखी थी ‘संघर्ष मा गुजरात’ किताब

New Delhi, 16 सितंबर . 17 सितंबर 1950 को Gujarat के वडनगर में जन्मे Prime Minister Narendra Modi ने इमरजेंसी में सक्रिय भूमिका निभाई थी. Narendra Modi ने गिरफ्तारी से बचते हुए लोगों को जागरूक किया. इमरजेंसी खत्म होते ही सिर्फ 23 दिन में ही खाना-पीन छोड़कर इमरजेंसी के दौरान Gujarat में संघर्ष पर किताब लिखी थी.

25 जून 1975 की आधी रात को नागरिकों की आजादी छीन ली गई, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई और सुबह होने से पहले ही विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था. विरोध करने वालों में Gujarat के 24 साल के आरएसएस प्रचारक Narendra Modi भी शामिल थे. गिरफ्तारी से बचते हुए उन्होंने छिपकर काम किया, संविधान को सार्वजनिक रूप से पढ़ने के कार्यक्रम आयोजित किए और पूरे Gujarat में कम्युनिटी और धार्मिक नेटवर्क के जरिए इमरजेंसी-विरोधी साहित्य फैलाने में मदद की. 21 महीनों तक, जब डर का माहौल बना दिया गया था, युवा Narendra Modi उस आंदोलन का हिस्सा बने रहे जिसने लोकतांत्रिक विरोध की भावना को जिंदा रखा.

1977 में जब इमरजेंसी खत्म हुई, तब Narendra Modi ने एक किताब लिखनी शुरू की. सिर्फ 23 दिनों में बिना किसी रेफरेंस बुक के और पूरी तरह अपनी याददाश्त के भरोसे, उन्होंने ‘संघर्ष मा Gujarat’ किताब पूरी की. लिखते समय उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था और सिर्फ नींबू पानी पीकर काम चलाया. यह किताब उन आम भारतीयों की कहानी थी, जिन्होंने छिपकर इमरजेंसी का विरोध किया था और जिनके त्याग के इतिहास में खो जाने का डर था.

Gujarat के तत्कालीन Chief Minister बाबूभाई जशभाई पटेल ने किताब का पहला संस्करण जारी किया था. पुस्तक के विमोचन के अवसर पर जसभाई पटेल ने पुस्तक के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा था, “संघर्ष एक ऐसा विषय है जिस पर कोई भी बड़ी-बड़ी बातें लिख सकता है लेकिन छोटी-छोटी बातों को लिखने के लिए शोध की आवश्यकता होती है. इस संघर्ष में Gujarat के आम लोगों का योगदान कभी भी आधिकारिक इतिहास में दर्ज नहीं होगा. उनके लिए, इसे लिखा जाना आवश्यक था.”

उन्होंने सभा को आपातकाल के वास्तविक अर्थ की याद दिलाते हुए कहा था, “तीस वर्षों में हम धीरे-धीरे, इंच-इंच करके, तानाशाही की ओर बढ़ते चले गए. शासन करने वाले यह भूल गए कि वे गरीबों के उत्थान की बात करते थे, लेकिन वास्तव में उन्होंने केवल अपना ही उत्थान किया.”

ओपी/पीएम

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