पाकिस्तान में महिला सुरक्षा पर सवाल, लाहौर में 8 महीने में रेप के 498 और 36 गैंगरेप के मामले आए सामने

इस्लामाबाद, 8 अक्टूबर . Pakistan में यौन हिंसा के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है. Police रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने Thursday को बताया कि सिर्फ लाहौर में 2026 के शुरुआती आठ महीनों में रेप के 498 और गैंगरेप के 36 मामले सामने आए.

‘वॉयस ऑफ Pakistan माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) ने आंकड़ों पर चिंता जताते हुए कहा कि इन आंकड़ों का मतलब है कि हर दिन औसतन चार से ज्यादा यौन अपराधों की रिपोर्ट दर्ज की जाती है.

अधिकारों के लिए काम करने वाली इस संस्था ने कहा, “ये सिर्फ कागजी आंकड़े नहीं हैं. ये बेटियां, बहनें, माताएं और पड़ोसनें हैं जिनकी जिंदगी बर्बाद हो गई है, और अक्सर उन्हीं घरों में जहां उन्हें सुरक्षित रहना चाहिए था.”

लाहौर में बढ़ती हिंसा का जिक्र करते हुए वीओपीएम ने कहा कि Police डिवीजन के हिसाब से मिले आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं. सदर में रेप के सबसे ज्यादा 132 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद मॉडल टाउन में 98, कैंटोनमेंट में 92, इकबाल टाउन में 80, सिटी में 56 और सिविल लाइन्स में 40 मामले सामने आए. सभी छह डिवीजनों में गैंगरेप के मामले सामने आए. मॉडल टाउन में 10, कैंटोनमेंट में नौ, और सदर व इकबाल टाउन में छह-छह मामले दर्ज किए गए.

संस्था ने कहा, “कोई भी इलाका इससे अछूता नहीं है. कोई भी समुदाय इससे बचा हुआ नहीं है. अगर अप्राकृतिक यौन संबंध (सोडोमी) के मामलों को भी शामिल किया जाए तो आठ महीनों में यौन अपराधों की कुल संख्या 1,108 तक पहुंच जाती है. यह अपराधों की ऐसी लहर नहीं है जो सिर्फ अंधेरी गलियों या पिछड़े इलाकों तक ही सीमित हो. यह अमीर इलाकों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और शांत रिहायशी सड़कों पर भी हो रहा है. हिंसा हर जगह है, और उसके साथ डर भी हर जगह है.”

इस बात पर जोर देते हुए कि ये आंकड़े पूरी तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा दिखाते हैं, वीओपीएम ने उन मानवाधिकार संगठनों का हवाला दिया जिन्होंने बार-बार चेतावनी दी है कि दर्ज की गई First Information Report असल में हुए अपराधों का बहुत छोटा हिस्सा ही होती हैं.

संस्था ने कहा, “बदनामी का डर, शर्म, परिवार का दबाव, Police पर अविश्वास और समाज से बहिष्कृत किए जाने का खतरा अनगिनत पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर करता है. कई लोग कभी रिपोर्ट नहीं करते. कई लोगों को चुप रहने के लिए कहा जाता है. कई लोगों को ही दोषी ठहराया जाता है. दर्ज मामलों में बढ़ोतरी एक साथ दो बातें बता सकती है कि ज्यादा अपराध होना और बोलने की हिम्मत बढ़ना. लेकिन ज्यादा रिपोर्टिंग के बावजूद, सिस्टम उन लोगों को निराश करता है जो सामने आते हैं.”

अधिकारों के लिए काम करने वाली इस संस्था ने लाहौर में अजरबैजान की एक 20 वर्षीय महिला के साथ कथित गैंग-रेप के मामले का भी जिक्र किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था. इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि सिर्फ विदेशी नागरिक ही पीड़ित नहीं हैं, Pakistanी महिलाओं और लड़कियों को रोजाना यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है, और कई मामलों पर तो बहुत कम ध्यान दिया जाता है.

वीओपीएम ने कहा, “लाहौर में रेप का संकट सिर्फ कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है. यह नैतिक विफलता है. यह संस्थाओं, नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की विफलता है. ये आंकड़े सिर्फ सहानुभूति से कहीं ज्यादा की मांग करते हैं. वे कार्रवाई की मांग करते हैं. जब तक दोषियों को सजा मिलने की दर नहीं बढ़ती, जब तक पीड़ितों को सुरक्षा नहीं मिलती, और जब तक अपराधियों को निश्चित सजा नहीं मिलती, तब तक लाहौर एक ऐसा शहर बना रहेगा जहां न्याय का वादा तोड़ा जाता है और चुप्पी ही एकमात्र सुरक्षा है.”

–

एससीएच/डीकेपी

Leave a Comment