पहले खाना खाकर चली जाती थी, फिर एक रात बदली पूरी कहानी, अभिषेक शर्मा बोले- ‘तारा मेरा परिवार है’

Mumbai , 5 अक्टूबर . टीवी शो ‘वसुधा’ में लीड रोल निभा रहे Actor अभिषेक शर्मा अपनी बिल्ली तारा के साथ बेहद खास बॉन्ड शेयर करते हैं. उन्होंने बताया कि तारा पहले उनके घर सिर्फ खाना खाने आया करती थी और फिर बाहर चली जाती थी, लेकिन एक रात हुई एक घटना ने दोनों के रिश्ते को पूरी तरह बदल दिया.

उस दिन के बाद अभिषेक को एहसास हुआ कि तारा अब सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं है, बल्कि उनके परिवार का हिस्सा बन चुकी है.

अभिषेक ने कहा, ”मैं बचपन से ही पेट्स के साथ रहा हूं और मेरी बिल्ली ने मुझे प्यार को एक अलग नजरिए से समझना सिखाया है. प्यार जताने के लिए हमेशा शब्दों या किसी बड़े जेस्चर की जरूरत नहीं होती. कई बार किसी का चुपचाप आपके पास बैठना भी बहुत कुछ कह जाता है. मेरी बिल्ली जब मुझे देखकर धीरे-धीरे आंखें झपकाती है, तो मुझे एक अलग तरह का सुकून मिलता है.”

उन्होंने कहा, ”तारा का सिर्फ मेरे पास रहना ही मुझे अच्छा महसूस कराता है. मैं घर में जहां भी जाता हूं, तारा अक्सर मेरे पीछे-पीछे चलती है. कभी वह मेरे पास बैठ जाती है तो कभी चुपचाप मेरे साथ समय बिताती है. मेरे लिए यही छोटी-छोटी चीजें रिश्ते को खास बनाती हैं. मेरा मानना है कि पेट्स बिना कुछ कहे भी अपना प्यार जाहिर करना जानते हैं.”

अभिषेक ने कहा, ”तारा के साथ मेरा रिश्ता उस समय और गहरा हुआ, जब एक रात वह बुरी तरह घायल हालत में मेरे घर पहुंची. तारा पहले कई हफ्तों और महीनों से मेरे घर खाना खाने आती थी और फिर बाहर खेलने चली जाती थी. लेकिन, एक रात तेज बारिश के बीच वह पूरी तरह भीगी हुई घर आई. दूसरी स्ट्रीट कैट्स के साथ उसकी लड़ाई हुई थी और उसके शरीर पर चोट के निशान थे. वह घायल थी और खून भी निकल रहा था.”

उन्होंने कहा, ”मैं बिना देर किए तारा को डॉक्टर के पास ले गया और उसका इलाज कराया. उस दिन मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ एक बिल्ली नहीं है, जो मेरे घर खाना खाने आती है. यह मेरा परिवार है. अब मैं अपना दिन उसकी जरूरतों के हिसाब से प्लान करता हूं. मैं जब भी काम पर जाता हूं, तो सोचता हूं कि तारा ने खाना खाया या नहीं, उसका मूड कैसा है, और उसकी तबीयत कैसी होगी. मेरे लिए वह अब एक ऐसी जिम्मेदारी है, जिसमें प्यार और लगाव दोनों शामिल हैं.”

अभिषेक ने कहा, “तारा मेरे मूड को काफी आसानी से समझ लेती है. मेरे घर में कदम रखते ही पहचान लेती है कि मैं खुश हूं, दुखी हूं, परेशान हूं या गुस्से में हूं. अगर मैं टेंशन में हूं या किसी बात को लेकर ज्यादा सोच रहा हूं, तो तारा मेरे आसपास ही रहती है. वह मेरे साथ वॉशरूम से लेकर किचन, बेडरूम और लिविंग रूम तक चली जाती है और जहां मैं बैठता हूं, वहीं मेरे पास बैठ जाती है.”

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पीके/एबीएम

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