
कोलकाता, 20 सितंबर . पश्चिम बंगाल Government राज्य के उन 4,133 Governmentी स्कूलों को चलाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है, जिनमें एक भी छात्र नहीं है, जबकि वहां शिक्षक तैनात हैं.
राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “इस मामले पर अगले एक महीने में फैसला किया जाएगा. पहले ही ऐसे 4,133 स्कूलों की पहचान की जा चुकी है जिनमें एक भी छात्र नहीं है, जबकि उनसे शिक्षक जुड़े हुए हैं. ऐसी स्थिति को अनिश्चित काल तक जारी नहीं रखा जा सकता. इसलिए भविष्य में इन स्कूलों का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस पर योजना बनाई जा रही है और इस मामले में इन शिक्षण संस्थानों को पीपीपी मॉडल के तहत चलाना सबसे व्यावहारिक विकल्प लगता है.”
राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव के निर्देश पर जिला मजिस्ट्रेटों ने इस मुद्दे पर काम करना शुरू कर दिया है.
विभाग के अधिकारी ने कहा, “स्कूलों की मौजूदा स्थिति की जांच के लिए जिलास्तर पर एक समिति काम करेगी. समिति स्कूल की इमारतों के बुनियादी ढांचे और लोकेशन सहित कई कारकों की जांच करेगी और उनके इस्तेमाल के तरीकों पर प्रस्ताव भेजेगी.”
उनके अनुसार, इस बात की संभावना बहुत कम है कि ऐसे सभी 4,133 स्कूलों के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया जाएगा.
राज्य स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी ने कहा, “जिन स्कूल की इमारतों में पीपीपी मॉडल लागू नहीं होगा, उनका इस्तेमाल स्वास्थ्य केंद्रों, प्रशिक्षण केंद्रों या किसी अन्य प्रशासनिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, हालांकि प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होगी कि ज्यादा से ज्यादा स्कूलों को पीपीपी मॉडल के तहत लाया जाए.
इसके अलावा, जिला मजिस्ट्रेटों के साथ-साथ विभाग की ओर से कोलकाता नगर निगम के कमिश्नर को भी पत्र भेजे गए हैं, ताकि राज्य की राजधानी में उन स्कूलों के भविष्य के बारे में फैसला किया जा सके जिनमें एक भी छात्र नहीं है, जबकि उनसे शिक्षक जुड़े हुए हैं.”
उनके अनुसार, ऐसे स्कूलों से जुड़े शिक्षकों का तबादला नजदीकी Governmentी स्कूलों में किया जा सकता है, जहां शिक्षक-छात्र अनुपात कम है.
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एससीएच/वीसी