
गांधीनगर, 9 अक्टूबर . पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और अस्थिरता ने वैश्विक उर्वरक आपूर्ति को अस्त-व्यस्त कर दिया है. इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में Gujarat में जैविक उर्वरकों और जैविक कीटनाशकों को प्रोत्साहन तथा नवाचार को गति देने एवं परंपरागत कृषि इनपुट्स पर निर्भरता कम करने के लिए एकीकृत बायोमैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने का आयोजन किया गया है.
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत कार्यरत Gujarat स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (जीएसबीटीएम) द्वारा पांच वर्षों में लगभग 50 करोड़ रुपए के खर्च से इस इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा.
जैविक खादों तथा जैविक कीटनाशकों के लिए बायोमैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करने हेतु Gujarat स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (जीएसबीटीएम) और आणंद कृषि विश्वविद्यालय (एएयू) के बीच आज (9 अक्टूबर, Friday) भावनगर में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया तथा कृषि, किसान कल्याण, सहकारिता एवं पशुपालन मंत्री जीतूभाई वाघाणी उपस्थित रहेंगे.
इस पहल का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध सूक्ष्मजीव संसाधनों, कृषि विश्वविद्यालयों, बायोटेक्नोलॉजी संस्थानों, स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईस), सहकारी संस्थाओं व किसानों को एक साथ जोड़ना है. इसके तहत सूक्ष्मजीवों की खोज, अनुसंधान, उत्पाद की फॉर्मूलेशन प्रक्रिया, उत्पादन, खेत में परीक्षण और किसानों द्वारा इसे अपनाने; इन सभी चरणों को शामिल करने वाली एकीकृत व्यवस्था तैयार की जाएगी.
India में खाद की मांग का मूल्यांकन करने, स्थानीय उत्पादन और आयात के बीच समन्वय स्थापित करने तथा यूरिया, डीएपी, म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) और एनपीके जैसे सब्सिडी वाले उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं.
चुनौती केवल अधिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की नहीं है, बल्कि कृषि इनपुट्स की अधिक सक्षम एवं लचीली व्यवस्था तैयार करने की है. जैविक उर्वरक, बायोस्टिमुलेंट्स, सूक्ष्मजीवों के संयोजन और अन्य जैविक टेक्नोलॉजियां किसानों को अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं. साथ ही पोषक तत्वों के कार्यक्षम उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक हो सकती हैं. परंपरागत उर्वरकों का महत्व बना रहेगा, लेकिन जैविक विकल्प कृषि इनपुट्स के स्रोतों में विविधता लाने में योगदान देंगे.
Gujarat की यह पहल राज्य में पहले से उपलब्ध अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण की क्षमता के आधार पर आगे बढ़ रही है. आणंद कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम, राइजोबियम, फॉस्फेट को घुलनशील बनाने वाले बैक्टीरिया तथा पोटेशियम को गतिशील करने वाले बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके जैविक उर्वरकों की तकनीक विकसित की गई है और इसका व्यावसायीकरण भी किया गया है. विश्वविद्यालय ने बायो-एनपी और बायो-एनपीके सहित सूक्ष्मजीवों के संयोजन भी विकसित किए हैं.
आणंद कृषि विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2024-25 तक लगभग 42 लाख लीटर जैविक उर्वरक का उत्पादन करके बिक्री की गई है. आणंद कृषि विश्वविद्यालय के पास जैविक उर्वरकों, जैविक कीटनाशकों और जैविक अपघटकों के विकास के लिए उपयोगी 1,000 से अधिक सूक्ष्मजीव संवर्धनों का संग्रह भी उपलब्ध है. इसके अलावा, 148 सूक्ष्मजीव स्ट्रेन्स के डीएनए सीक्वेंस का डेटा नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (एनसीबीआई) के पास जमा कराया गया है. यह कार्यक्रम चार परस्पर जुड़े हुए घटकों पर केंद्रित रहेगा.
–
डीएससी