पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर फर्जी सेंक्शन लेटर भेजकर ठगी करने वाले गिरोह के दो साइबर अपराधी गिरफ्तार

नोएडा, 3 सितंबर . पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ नोएडा साइबर क्राइम Police ने बड़ी कार्रवाई की. थाना साइबर क्राइम नोएडा Police ने तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर गिरोह से जुड़े दो वांछित साइबर अपराधियों को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया है.

दोनों आरोपियों की पहचान तुषार (21 वर्ष) पुत्र कपिल देव और सुमित कुमार (21 वर्ष) पुत्र रामेश्वर प्रसाद के रूप में हुई है. दोनों आरोपी खोड़ा कॉलोनी, थाना खोड़ा, गाजियाबाद के निवासी हैं. Police के अनुसार, यह गिरोह लोन की जरूरत वाले लोगों को निशाना बनाता था. गिरोह के सदस्य आरयूलोन्स कंपनी से प्राप्त डाटा का कथित रूप से दुरुपयोग कर लोगों से संपर्क करते थे और उन्हें कम समय में पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देते थे. इसके बाद विश्वास में लेने के लिए पीड़ितों को फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजा जाता था.

लोन स्वीकृत होने का भरोसा दिलाने के बाद आरोपियों द्वारा प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी. रकम प्राप्त होने के बाद पीड़ितों के साथ ठगी की जाती थी. इस मामले में थाना साइबर क्राइम नोएडा में मुकदमा दर्ज है. Police ने बताया कि इस प्रकरण में इससे पहले भी दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा जा चुका है. अब जांच के दौरान सामने आए दो अन्य वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने Police को बताया कि वे अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने के लिए किराए पर उपलब्ध कराते थे. इसके बदले उन्हें कुल रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था. आरोपियों द्वारा अपने खातों के साथ-साथ विभिन्न म्यूल बैंक खातों को भी साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाता था. Police जांच में सामने आया कि आरोपी तुषार के बैंक खाते में 1 लाख 20 हजार रुपए, जबकि सुमित के बैंक खाते में 2 लाख 20 हजार रुपए प्राप्त हुए. इस तरह दोनों खातों में कुल 3 लाख 40 हजार रुपए की रकम प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है.

Police के मुताबिक, इन बैंक खातों के संबंध में विभिन्न राज्यों के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज हैं. इनमें Maharashtra और तमिलनाडु से कुल दो शिकायतें शामिल हैं. आरोपी साइबर अपराधियों से प्राप्त रकम में से अपना कमीशन काट लेते थे और बाकी धनराशि संबंधित साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते थे. Police अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच कर रही है.

Police को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और लेन-देन की जानकारी भी सामने आ सकती है. साइबर क्राइम Police ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा फोन, व्हाट्सऐप या अन्य माध्यम से दिए गए लोन के ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें. लोन सेंक्शन लेटर या दस्तावेज मिलने के बावजूद उसकी सत्यता की जांच किए बिना किसी भी प्रकार की प्रोसेसिंग फीस अथवा अन्य शुल्क जमा न करें.

Police ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है. यदि कोई व्यक्ति खुद को Police, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स, इनकम टैक्स या किसी अन्य Governmentी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर डराता है और गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट की धमकी देता है, तो घबराने के बजाय तुरंत Police या साइबर क्राइम Police से संपर्क करना चाहिए.

पीकेटी/डीकेपी

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