
Patna, 10 सितंबर . बिहार Government में मंत्री राम कृपाल यादव ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या, बिहार की बाढ़ और पश्चिम बंगाल में बंगाली भाषी लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष पर निशाना साधा.
राम कृपाल यादव ने पंजाब Government पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है और राज्य के युवा इसका शिकार होकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं. पंजाब के कई युवा कभी देश की सुरक्षा बलों में सेवा देने के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब ड्रग्स की गिरफ्त में आ रहे हैं. पंजाब की मौजूदा Government इस गंभीर समस्या को लेकर पर्याप्त गंभीर नहीं है.
उन्होंने कहा कि Government कांग्रेस के समर्थन से चल रही है और जब कोई युवा ड्रग्स के मुद्दे पर सवाल उठाता है तो उस पर दबाव बनाया जाता है. उन्होंने इसी संदर्भ में गुलजार सिंह की आत्महत्या का जिक्र करते हुए पंजाब Government की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए.
बिहार में बाढ़ की स्थिति पर राम कृपाल यादव ने कहा कि राज्य के कई जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं. Patna, बेगूसराय समेत कई इलाकों में पानी का स्तर बढ़ रहा है. Chief Minister नीतीश कुमार ने स्थिति पर चिंता जताते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए दवाइयों, भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है.
मंत्री ने कहा कि पशुओं के लिए चारे और आश्रय की व्यवस्था सहित अन्य चीजों के लिए अधिकारियों को जरूरी राहत उपाय करने के निर्देश दिए हैं और पूरे हालात की निगरानी कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए दवाइयों, भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. पशुओं के लिए चारे और आश्रय की व्यवस्था का भी जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग अपने गांवों से बाहर निकलने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए सूखे राशन की व्यवस्था की जा रही है.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा Union Minister अमित शाह को लिखे पत्र पर भी राम कृपाल यादव ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कांग्रेस नेतापर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बंगाली भाषा बोलने वाले लोगों को देश के किसी भी हिस्से में रहने और अपनी आजीविका चलाने का संवैधानिक अधिकार है.
दरअसल अपने पत्र में अधीर रंजन चौधरी ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और अन्य राज्यों में बंगाली भाषी भारतीय कामगारों को ‘बांग्लादेशी’ बताकर मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी. साथ ही कहा था कि अगर राज्य बंगाली भाषा को ही खतरा मानता है, तो संसद में बंगाली को आठवीं अनुसूची से हटाने का प्रस्ताव लाया जाए.
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एसएके/वीसी